
जयपुर/ नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसक घटनाओं की रोकथाम के लिए अलग से कानून बनाने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को गोरक्षा के नाम पर हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कोई भी नागरिक अपने हाथ में कानून नहीं ले सकता। न्यायालय ने स्वयंभू गोरक्षकों पर अंकुश लगाने एवं संबंधित घटनाओं की रोकथाम के लिए कुछ दिशा निर्देश भी जारी किए हैं और इन पर अमल के लिए चार सप्ताह का वक्त दिया।
न्यायालय ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि केंद्र सरकार गोरक्षा से जुड़ी हिंसा की घटनाओं की रोकथाम के लिए अलग से कानून बनाये। पीठ ने कहा कि 'भीड़तंत्र' पर अंकुश लगाना और कानून व्यवस्था लागू करना सरकार का काम है। पीठ की ओर से फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, 'भय और अराजकता की स्थिति में सरकार को सकारात्मक कदम उठाना होता है। हिंसा की अनुमति किसी को भी नहीं दी जा सकती। कोई भी नागरिक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता।' शीर्ष अदालत ने तहसीन पूनावाला और महात्मा गांधी के पड़पौत्र तुषार गांधी की याचिकाओं की विस्तृत सुनवाई के बाद गत तीन जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
राजस्थान में भी हो चुकीं हैं दिल दहला देने वाली घटनाएं
राजस्थान में गोरक्षा के नाम पर लिंचिंग के दो बड़े मामले सुर्ख़ियों में रहे थे। एक मामला अलवर का साल 2017 का रहा जबकि दूसरा मामला साल 2015 का था।
पहला मामला नागौर का
राजस्थान के नागौर में 30 मई 2015 को अब्दुल गफ्फार खान की गोरक्षा के नाम पर हत्या ने हर किसी को हिला कर रख दिया था। गौरतलब है कि खींवसर तहसील के कुम्हरी गांव के एक खाली जमीन पर 200 गायों के कंकाल मिले थे। जिसके बाद खबर ये फैली कि एक समुदाय विशेष के लोगों ने 200 गायों को मारकर उनका सेवन किया है। जिससे बिरलोका गांव के सब्जी बेचने वाले अब्दुल गफ्फार कुरेशी को कथित गोरक्षकों की भीड ने पकडकर मार डाला था।
दूसरा मामला अलवर का
अलवर में कथित गौरक्षकों के हमले में बहरोड़ थाना क्षेत्र में गाये ले जा रहे एक पहलू खां नाम का शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया था जिसने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। मामला काफी गर्माया गया था।
1 अप्रैल, 2017 को 55 वर्षीय पेहलू खान एक पिकअप में 2 गाय, 3 बछडे भरकर रामगढ़ हटवाड़ा से अपने गांव जयसिंगपुर, नूह तहसील, मेवात जिला, हरियाणा की ओर जा रहा था। उसके पीछी एक अन्य ट्रक में पहलू खान का पुत्र इर्शाद व आरीफ एवं साथ में रफीक 6 गाय व बछड़ो को लेकर जा रहे थे। शाम करीब साढ़े 6 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर बहरोड़ और अलवर के बीच बड़ी संख्या में कथित गोरक्षकों ने दोनों गाडियों पर हमला कर दिया। उनकी न केवल गाडिया तोडी गई बल्कि उन्हें घसीट कर गाडियों से निकाल कर बुरी तरह मारा गया। उन पर लाठियों और पत्थरों से प्रहार किया गया। इस हमले में पहलू खान गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी बाद में उपचार के दौरान मौत हो गई।
जयपुर में बीफ खिलाने पर हुआ था हंगामा
मार्च 2017 को जयपुर के होटल हैयात रब्बानी में गोमांस परोसे जाने के मामले ने भी तूल पकड़ा था। गो-रक्षकों ने उस दौरान जमकर हंगामा किया था। हंगामे के बाद होटल को सील कर दिया गया था। उस समय राष्ट्रीय गोरक्षा दल की अध्यक्ष साध्वी कोमल दीदी अपने सैंकड़ों समर्थकों के साथ होटल के बाहर पहुंच गईं थी। साध्वी ने होटल में गोमांस परोसे जाने का आरोप लगाया था। इसके बाद वहां जमकर प्रदर्शन हुआ था। हंगामे के बाद रात में पुलिस पहुंची और होटल को सील करा दिया गया।
'नफरत की आग' में राजस्थान तीसरे नंबर पर
मानव अधिकारों की रक्षा करने वाले समूह एमनेस्टी इंटरनेशल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2018 के शुरुआत के छह महीनों के भीतर 100 हेट क्राइम (नफरत की आग) की वारदातें हुई हैं। इसका शिकार आदिवासी, दलित, जातीय और धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के लोग और ट्रांसजेंडर हुए हैं। इस मामले में राजस्थान तीसरे स्थान पर है जहां पर अभी तक ऐसी 8 घटनाएं हुई हैं। पहले पायदान पर उत्तर प्रदेश है, जहां हेट क्राइम की 18 घटनाएं हुई हैं जबकि दूसरे स्थान पर 13 मामलों के साथ गुजरात है। तमिलनाडु और बिहार चौथे और पांचवें स्थान पर हैं, जहां से कुल 7 मामले सामने आए हैं।
Updated on:
17 Jul 2018 12:28 pm
Published on:
17 Jul 2018 12:26 pm
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