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surya in hasta nakshatra – हस्त नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश इन लोगों के खोलेगा भाग्य, जानिए आपके लिए कैसा रहेगा यह परिवर्तन

नवग्रहों के राजा सूर्य कुछ दिनों के अंतराल में एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इस नक्षत्र परिवर्तन का व्यापक असर पड़ता है। अधिक मास आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि और शनिवार पूरा दिन पार कर देर रात 12 बजकर 29 मिनट पर सूर्यदेव हस्त नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्यदेव 10 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट तक यहीं पर रहेंगे।

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 Sun Transit

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जयपुर. नवग्रहों के राजा सूर्य कुछ दिनों के अंतराल में एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इस नक्षत्र परिवर्तन का व्यापक असर पड़ता है। अधिक मास आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि और शनिवार का पूरा दिन पार कर देर रात 12 बजकर 29 मिनट पर सूर्यदेव हस्त नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्यदेव 10 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट तक यहीं पर रहेंगे।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार हस्त नक्षत्र शुभ नक्षत्रों की श्रेणी में आता है। हस्त नक्षत्र हमारे भाग्य को उज्ज्वल करने वाला है. इस दौरान किये गये सभी कार्यों का शुभ फल प्राप्त होता है। सूर्यदेव के इस नक्षत्र बदलाव से विभिन्न नक्षत्र वाले लोगों पर शुभ या अशुभ प्रभाव पड़ सकता है।

हस्त, चित्रा और स्वाति नक्षत्र में जन्मे लोग
इन लोगों पर सूर्य के इस परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा. जिन लोगों के नाम प, ठ, र या त से शुरू होते हों, उन लोगों को बिजली उपकरणों, आग आदि से संभलकर रहना होगा. सूर्यदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए सुबह सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए।

विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा या मूल नक्षत्र में जन्मे लोग
इन नक्षत्रों में जन्मे या जिनका नाम त, य, न या भ अक्षर से शुरू होता हो, उन लोगों पर इस परिवर्तन का मिलाजुला असर होगा। इस दौरान आप बेचैन रह सकते हैं और मनोरंजन की तलाश में रहेंगे. किसी मन्दिर या धर्मस्थल पर दान करने से राहत मिलेगी।

पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण या धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे लोग
इन नक्षत्रों में जन्मे या जिनका नाम भ, ध, फ, ज, ख या ग से शुरू होता है, वे लोग इस दौरान जो भी काम करेंगे, वो लंबे समय तक फलदायक होंगे. इन लोगों द्यारा शुरू किए गए काम स्थिर होंगे। पीतल के बर्तन का इस्तेमाल करना इनके लिए शुभ होगा।

शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोग
जिन लोगों का जन्म इन नक्षत्रों में हुआ हो या जिनके नाम का पहला अक्षर ग, स, द या झ हो, उन लोगों को यह परिवर्तन धनलाभ कराएगा। ऐसे लोगों को 10 अक्टूबर तक मां लक्ष्मी की आराधना जरूर करना चाहिए. उनकी कृपा से अथाह धनसंपत्ति प्राप्त हो सकती है।

रेवती, अश्विनी, भरणी या कृतिका नक्षत्र में जन्मे लोग
सूर्य के इस परिवर्तन का इन लोगों को जबर्दस्त लाभ मिलेगा. इन नक्षत्र में जन्मे या जिनका नाम द, च, ल, अ, ई, उ या ए अक्षर से शुरू होता हो, ऐसे लोगों को 10 अक्टूबर तक के समय का भरपूर लाभ उठाने के लिए सूर्य देव की पूजा जरूर करनी चाहिए।

रोहिणी, मृगशिरा और आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे लोग
जिन लोगों का जन्म इन तीन नक्षत्र में हुआ हो और जिनके नाम का पहला अक्षर व, क, घ या छ हो, उन लोगों पर मिलाजुला असर होगा। कुछ कष्ट उठाना पड़ेगा तो कुछ धनसंपत्ति भी मिल सकती है। ऐसे लोग 10 अक्टूबर तक सूर्यपूजा अवश्य करें।

पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा या मघा नक्षत्र में जन्मे लोग
इन तीन नक्षत्र में जन्म लोग या जिनका नाम क, ह, ड या म अक्षर से शुरू होता हो, उन लोगों को धनलाभ हो सकता है। हालांकि 10 अक्टूबर तक इन्हें लेनदेन समझदारी से ही करना चाहिए। सूर्यदेव को अर्घ्य देने से लाभ मिलेगा।

पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे लोग
जिन लोगों का जन्म उपरोक्त दो नक्षत्र में हुआ हो या जिनका नाम म, ट या प अक्षर से शुरू होता हो, उन लोगों को मिलाजुला परिणाम मिल सकता है। कुछ लाभ होगा और छोटी-मोटी हानि भी हो सकती है। 10 अक्टूबर तक सूर्यदेव को अर्घ्य देने से लाभ मिलेगा।