
टोंक रोड. समर शुरू होते ही स्वीमिंग पूल की रौनक बढ़ जाती है। इन गर्मियों में पूल की ठण्डक एक नई ताजगी का अहसास करवाती है। स्वीमिंग करने का सबसे ज्यादा क्रेज बच्चों को रहता है। वे पानी में अठखेलियां करते हैं और खूब मौज-मस्ती करते हैं। इन गर्मियों में कॉलोनीज के पूल भी शुरू हो गए हैं। वे बच्चों को बेसिक से लेकर डाई, बटरफ्लाई, डॉल्फिन, डीप फ्लोटिंग, आदि तकनीकियों को बारीकी से सिखा रहे हैं। कुछ बच्चे हर महीने स्वीमिंग करना पसंद कर रहे हैं तो कुछ ५ साल के होते ही पहली बार पूल में उतरकर पानी से अपना डर निकाल रहे हैं। बच्चों को शुरू में सांस रोकने और छोडऩे की ट्रेनिंग दी जाती है, वाटर फ्रेण्डली बनाया जाता है।
फस्र्ट टाइम स्वीमिंग-
बरकत नगर निवासी तेजस काबरा थर्ड क्लास में पढ़ते हैं। वे बताते हैं कि मैं पहली बार स्वीमिंग सीख रहा हूं। मम्मी मुझे रोज लेने और छोडऩे आती हैं। १५ दिनों में मैंने फ्लोटिंग और बटरफ्लाई सीख ली हैं। स्वीमिंग से बॉडी भी फिट रहती हैं और पानी में मस्ती करने का अलग ही एंजॉयमेंट है। शुरू-शुरू में थोड़ा पानी से डर लगा, इसलिए सर हमें डीप में नहीं ले जाते थे, लेकिन अब फ्लोटिंग आने से स्वीमिंग आसान हो गई हैं। पानी में क्लोरीन मिला होता है, इसलिए स्किन के काले होने का डर रहता है। मम्मी रोज रात को दूध-मलाई लगाती है, इसलिए अब वो डर भी नही हैं।
फ्रेण्ड्स के साथ खूब मस्ती-
गंगाविहार कॉलोनी निवासी हर्षल श्रीमाल पहली क्लास में पढ़ते हैं। वे बताते हैं कि मैं भी फस्र्ट टाइम स्वीमिंग सीख रहा हूं। इन गर्मियों में हम चील पार्टी करते हैं। अब सब फ्रेण्ड्स बन गए हैं तो खूब मस्ती हो जाती हैं। पहले मैं थोड़ा डरता था, इसलिए कैप, ईयर बर्ड, गॉगल व अन्य एसेसरीज के साथ ही पूल में उतरता, लेकिन अब तो बहुत कॉन्फिडेंस आ गया है। इन सबकी जरूरत नहीं पड़ती। स्वीमिंग के बाद रात को गहरी नींद भी आती हैं।
स्वीमिंग से हाईट बढऩे में मदद-
दयानंद कॉलोनी निवासी भाई-बहिन ईशान और ईशानी साथ में स्वीमिंग सीख रहे हैं। ईशान ११ साल के हैं तो ईशानी ८ साल की। वे बताते हैं कि हम दोनों ही स्वीमिंग फस्र्ट टाइम सीख रहे हैं। ईशानी को स्वीमिंग का ज्यादा क्रेज है। उसने कम समय में ही फ्लोटिंग और बटरफ्लाई एक्सरसाइज सीख ली है। वे हर तकनीक को जल्दी पकड़ लेती हैं और कॉन्फिडेंस से स्वीमिंग कर रही हैं। ईशान की हाईट थोड़ी कम है, इसलिए वो स्वीमिंग से अपनी हाईट बढ़ाना चाहता है। वे दोनों ही तीन महीने तक स्वीमिंग सीख कर चैंपियन बनना चाहते हैं।
स्वीमिंग है बेस्ट एक्सरसाइज-
७ साल की नव्या धायल तीसरी क्लास में पढ़ती हैं। उन्होंने मां से जिद करके स्वीमिंग सीखना शुरू किया हैं। वे बताती हैं कि मुझे शुरू से ही पानी में एंजॉय करना बहुत अच्छा लगता है। स्पोर्ट्स में बॉडी की सबसे बेस्ट एक्सरसाइज है स्वीमिंग। हम पूल से आने के बाद दोबारा शॉवर लेते हैं ताकि क्लोरिन का कोई इफेक्ट ना पड़े। ऐसे हम दिन में तीन बार रोजाना नहा लेते हैं।
दो साल से स्वीमिंग-
मधुबन कॉलोनी निवासी अनिष्का ५वीं क्लास में पढ़ती हैं। उन्होंने लास्ट ईयर भी स्वीमिंग सीखा था। वे बताती हैं कि इस साल स्वीमिंग मेरे लिए ज्यादा डिफिकल्ट नहीं रही। दो-तीन दिन प्रेक्टिस में लगे और उसके बाद स्वीमिंग एंजॉय करने लगी। इससे मेरी हाईट भी थोड़ी बढऩे लगी है। पूल में हम कोच के दिए निर्देशों का पूरी तरह पालन करते हैं। यहां हर समय लाइफ गार्ड भी मौजूद रहता है, इसलिए पूल में डूबने का डर भी नहीं हैं। मैं हर साल स्वीमिंग सीखूंगी और भविष्य में इस फील्ड में कॅरियर भी बनाऊंगी।
पूल में उतरने से पहले सनस्क्रीन लोशन-
कीर्ति नगर निवासी सौम्या दूसरी क्लास में पढ़ती हैं। वे बताती हैं कि समर वेकेशन में हर साल मैं कोई ना कोई हॉबी क्लासेज ज्वाईन करती हूं। इस साल पेरेंट्स और फ्रेण्ड्स के कहने पर स्वीमिंग ज्वाईन किया। इतने कम समय में मुझे फ्लोटिंग, बब्लिंग, साइकलिंग अनेक टैक्निक आ गई हैं। हर रोज क्रेज रहता है कि आज क्या नया सिखाएंगे। शुरू में पानी से थोड़ा जुकाम भी हुआ, लेकिन उसी पानी ने जुकाम ठीक भी कर दिया। स्वीमिंग करने से भूख भी लगती हैं तो ढ़ेर सारा खाना भी खाती हूं। मैं स्किन का भी ध्यान रखती हूं। पूल में उतरने से पहले सनस्क्रिन लोशन लगाती हूं ताकि चेहरा काला नहीं पड़े।
पूल में उतरने से पहले काउसंलिंग-
हम करीब ८ साल से स्वीमिंग सिखा रहे हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चों को पूल में नहीं उतरने दिया जाता। पूल सिर्फ ८ फिट ही गहरा है, जो बच्चे नए हैं उन्हें कम हाइट के पानी में ही रहने की इजाजत है। लगातार ध्यान रखा जाता है कि किसी का पैर तो नहीं फिसल रहा है। नए बच्चे ग्रुप में ही रहते हैं। थोड़ा स्ट्रिक भी होना पड़ता है, वरना बच्चे डीप में जाने के लिए एक्साइटेड रहते हैं। पूल में उतरने से पहले उनकी पूरी काउंसलिंग की जाती है और पानी के डर को दूर किया जाता है। मैं खुद सुबह और शाम सभी बैचेज में पूरे समय पूल में ही रहता हूं ताकि बच्चों की ज्यादा से ज्यादा स्वीमिंग की प्रेक्टिस करवाई जा सकें।
-सत्यनारायण शर्मा, कोच
साफ-सफाई का पूरा ध्यान-
बैचेज के समय मैं हमेशा पूल के पास ही खड़ा रहता हूं, ताकि अगर किसी सांस फूल रही हैं या उल्टियां हो रही है तो तुरंत पूल में से निकाला जा सकें। हर वीक पानी की क्लिनिंग की जाती है, और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। पानी में क्लोरिन कम मिलाया जाता है। पूल का समय सिर्फ तीन महीने का ही रहता है। एक महीने में १०० से ज्यादा बच्चे ट्रेनिंग लेते हैं। इनमें बच्चे ज्यादा है, जबकि महिलाओं की संख्या अब धीरे-धीरे बढ़ रही है। मैं हमेशा बच्चों की सिक्योरिटी के लिए पूल के पास मौजूद रहता हूं।
प्रदीप, लाइफ गार्ड और ट्रेनर
Published on:
26 Apr 2018 12:38 pm
