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Rajasthan Education News: जयपुर- प्रदेश के करीब 20 हजार वरिष्ठ अध्यापक (विषय अध्यापक) आज भी वरिष्ठता विलोपन झेलने को मजबूर हैं। दरअसल, मंडल परिवर्तन के बाद वर्षों की सेवा देने वाले शिक्षक अपने ही वरीयता से पीछे हट रहे हैं, जिससे उनकी पदोन्नति प्रभावित हो रही है। राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र नागवाल ने बताया कि समस्या का कारण वर्ष 2011 के बाद लागू राज्य स्तरीय भर्ती प्रक्रिया है।
इससे पहले भर्ती मंडल स्तर पर होती थी। अब राज्य स्तर पर चयन होने के बावजूद अंतर-मंडल स्थानांतरण से शिक्षकों की पूरी वरिष्ठता खत्म कर उन्हें नए मंडल में सबसे कनिष्ठ बना दिया जाता है। इससे शिक्षकों के साथ भेदभाव हो रहा है। इस संबंध में संघ ने शिक्षा मंत्री व अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर राजस्थान सेवा नियम 1971 में संशोधन की मांग की है।
जयपुर। शिक्षा विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन ने मंत्रालयिक ‘संवर्ग’ के अधिकारियों व कर्मचारियों की पदस्थापन प्रक्रिया को ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से कराने और लंबित डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) शीघ्र आयोजित करने की मांग की है। मांग पूरी न होने पर संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने बताया कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर 15 अप्रैल 2026 तक रिक्त पदों पर नियुक्ति व लंबित डीपीसी पूरी करने और काउंसलिंग से पदस्थापन के आदेश जारी करने की मांग की गई है।
साथ ही वर्ष 2017 से 2024-25 तक की लंबित नियुक्तियों, कनिष्ठ सहायक से लेकर अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारियों तक पदोन्नति और वरिष्ठता निर्धारण से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने की मांग भी उठाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय में मांगें नहीं मानी गईं, तो 21 अप्रैल से शिक्षा निदेशालय बीकानेर के समक्ष दो दिवसीय धरना दिया जाएगा। इसके बाद आंदोलन अनिश्चितकालीन किया जाएगा।
जयपुर। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों की भूमिका को समाज निर्माण का आधार बताते हुए स्कूलों में अनुशासन और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला हैं, इसलिए यहां कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी का आचरण आदर्श होना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने बड़ा निर्देश देते हुए कहा कि शराब पीने, गुटखा और तंबाकू सेवन करने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार की जाए और ऐसे कर्मियों पर सख्त निगरानी रखी जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के रोल मॉडल होते हैं, इसलिए उनका व्यवहार विद्यार्थियों पर सीधा प्रभाव डालता है। यदि शिक्षक स्वयं अनुशासित और नशामुक्त रहेंगे तो छात्र भी उनसे प्रेरणा लेंगे। मंत्री ने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए कि विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए।
Published on:
13 Apr 2026 11:12 am
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