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तबादलों में फंसा पेच, कौन करे तबादला सूचियों पर हस्ताक्षर

— दो विभागों के बीच फंसे शिक्षक, अब द्वितीय श्रेणी और व्याख्याताओं के तबादलों की कवायद शुरू

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

May 14, 2018

Teacher's Transfer

Teacher's Transfer

जयपुर। चुनावी साल में इस बार सरकार ने तबादलों से बैन तो हटा दिया, लेकिन अभी तक शिक्षा विभाग में तबादले शुरू नहीं हुए हैं। बैन खुले करीब 2 महीने हो गए, फिर भी शिक्षक तबादलों के लिए परेशान हो रहे हैं। पिछले 13 दिनों से शिक्षा संकुल में तृतीय श्रेणी तबादलों के लिए चल रहा कैंप भी खत्म हो गया है, लेकिन अभी तक कोई भी सूची जारी नहीं हुई है। इससे शिक्षक परेशान हो रहे हैं। जानकारों के अनुसार विभाग के आला अधिकारियों और शिक्षा राज्य मंत्री के सामने यह समस्या आ गई है कि आखिर इन तबादला सूचियों पर हस्ताक्षर कौन करे।
तृतीय श्रेणी शिक्षकों का नियुक्ति अधिकारी जिला परिषद सीईओ है,ऐसे में इनके स्थानान्तरणों पर जिला शिक्षा अधिकारी हस्ताक्षर नहीं कर सकते। अब द्वितीय श्रेणी शिक्षक और व्याख्याताओं के तबादलों की कवायद शुरू हो गई है। हालांकि अभी विभाग ने इनसे आवेदन नहीं मांगे हैं।

प्रस्ताव बनाकर दिए
जानकारों के अनुसार करीब 60 हजार से अधिक तृतीय श्रेणी के शिक्षकों ने तबादलों के लिए आवेदन किया। इन तबादला कैम्प में अधिकारियों ने 30 अप्रेल से 11 मई तक स्थानान्तरण के प्रस्ताव तैयार कर सरकार और शिक्षामंत्री कार्यालय को भेज भी दिए।

पहले निदेशक ने किए हस्ताक्षर
पिछले दिनों कई बार तृतीय श्रेणी के विशेष शिक्षकों के तबादले हुए। इनमें राज्यादेश होने के कारण निदेशक ने हस्ताक्षर कर जिला शिक्षा अधिकारियों को सूची दी। अब भी हस्ताक्षर को लेकर विवाद चल रहा है।

अटक सकता है मामला
तृतीय श्रेणी शिक्षक दो विभागों के बीच फंसे हैं। इसमें पंचायती राज और शिक्षा विभाग हैं। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले पर जिला शिक्षा अधिकारी हस्ताक्षर करते हैं तो उन्हें पहले जिला परिषद की स्थाई समिति से अनुमोदन कराना होगा। इस व्यवस्था में सूचियां अटक सकती हैं। परिषद में दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के जनप्रतिनिधि शामिल हैं।

मंत्री और अधिकारी आमने—सामने
तृतीय श्रेणी तबादलों को लेकर मंत्री और अधिकारी आमने—सामने हो रहे हैं। मंत्री डिजायर के आधार पर तबादला कराना चाहते हैं, जबकि विभाग के आला अधिकारी विभागीय नीति से काउंसलिंग के आधार पर तबादला कराना चाहते हैं। अब यह मामला सीएमओ तक पहुंच चुका है।