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एंकर: जगत्गुरु बनना है तो वीतरागता को जीवन में उतारना होगा: पं. ज्ञानबोधि विजय

जयपुर

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Newsdesk

Aug 16, 2026

Rajasthan

- सोमवार को नेमिनाथ जन्मकल्याणक पर आयोजित होगी भाव यात्रा



चेन्नई.
श्री वेपेरी श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्य कुलबोधि सूरीश्वर के सुशिष्य पंन्यास ज्ञानबोधि विजय ने शनिवार को 'ललितविस्तरा' ग्रंथ का विवेचन करते हुए जयवीयराय प्रार्थना सूत्र की महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि इस प्रार्थना सूत्र के माध्यम से साधक को परमात्मा के समीप ले जाने का प्रयास किया गया है। संसार में वास्तविक उपासना के योग्य वीतराग भगवान हैं और उनकी वीतरागता ही उन्हें जगतगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करती है। साधना के माध्यम से गुरु तो बना जा सकता है, लेकिन जगतगुरु बनने के लिए वीतरागता आवश्यक है। सभी जीवों के कल्याण की भावना ही प्रभु को जगतगुरु बनाती है। प्रभु की निर्मलता, निर्दोषता और निर्द्वंद्वता उनकी महानता का आधार है। उन्होंने कभी किसी के साथ भेदभाव या किसी के प्रति दुर्भाव नहीं रखा। अपने पापों को स्वीकार करना और समवसरण में सभी के प्रति समान भाव रखना उनकी निर्द्वंद्वता को दर्शाता है। हम अनादिकाल से संसार में परिभ्रमण कर रहे हैं। यदि कुसंस्कारों को नहीं बदला गया तो यह यात्रा अनंतकाल तक चल सकती है। हमारी और सिद्ध भगवान की आत्मा में कोई अंतर नहीं है, अंतर केवल इतना है कि सिद्धात्मा में अनंत ज्ञान प्रकट हो चुके हैं। हमारे अनेक कर्म कटने के बाद भी आत्मा पर कुसंस्कार चिपकते गए और उन्हीं ने संसार भ्रमण को बढ़ाया। शत्रुंजय तीर्थ जैसे पवित्र क्षेत्र के कण-कण में असंख्य आत्माओं ने मोक्ष प्राप्त किया है। उपाश्रय में जागृत होने वाले धार्मिक भाव भी क्षेत्र के प्रभाव को दर्शाते हैं।
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कल आयोजित होगी भाव यात्रा

सोमवार को भगवान नेमिनाथ प्रभु का जन्मकल्याणक संघ में धूमधाम एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर गिरनार तीर्थ की सुंदर एवं आकर्षक रचना कराई जाएगी। अहमदाबाद के विराज शाह अपनी अद्भुत एवं प्रभावशाली शैली में श्रद्धालुओं को गिरनार तीर्थ की भावयात्रा कराएंगे।