
Mob Lynching Bill: जयपुर। मॉब लिंचिंग पर रोक के लिए कांग्रेस सरकार के समय विधानसभा से पारित कर भेजा गया विधेयक केन्द्र सरकार ने लौटा दिया है। केन्द्र सरकार से लौटा यह विधेयक राज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए विधानसभा भेज दिया गया है।
मौजूदा सरकार ने पिछले साल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में प्रावधान होने के कारण मॉब लिंचिंग पर कानून नहीं बनाने की इच्छा जताई थी। भाजपा विधायकों ने विधानसभा में चर्चा के दौरान भी इस विधेयक का विरोध किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 में तहसीन पूनावाला केस में मॉब लिंचिंग रोकने के प्रावधान करने को कहा था। कांग्रेस सरकार ने 30 जुलाई 2019 को विस. में राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक पेश किया।
विधेयक में लिंचिंग रोकने और पीड़ितों के पुनर्वास के प्रावधान थे। राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए दिल्ली भेजा था। आने वाले सत्र में विधेयक लौटने की सूचना सदन को दी जाएगी।
-लिंचिंग में चोट लगने पर दोषी को 7 साल तक की सजा और एक लाख तक जुर्माना
-गंभीर चोट लगने पर दोषी को दस साल तक की सजा और 3 लाख रुपए तक जुर्माना
-हत्या होने पर दोषी को उम्रकैद व एक से पांच लाख रुपए तक जुर्माना
-घटना में सहयोग करने वालों को पांच साल तक की सजा व एक लाख रुपए जुर्माना
-घटना को बढ़ावा देने के लिए प्रकाशन या प्रसारण करने वालों को एक से तीन साल तक सजा
-सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश
-पीड़ित के उपचार और उन्हें प्रतिकर राशि देने का प्रावधान
-विस्थापन की स्थिति में पुनर्वास व सुविधायुक्त राहत शिविर की व्यवस्था
हत्या के अपराध से संबंधित बीएनएस की धारा 103 की उपधारा (2) में प्रावधान है कि 5 या अधिक सदस्यों के जाति, समुदाय, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान, भाषा व आस्था के आधार पर हमला किए जाने से किसी की मौत होने पर दोषियों को उम्रकैद की सजा होगी तथा जुर्माना लगाया जाएगा।
Updated on:
25 Jan 2025 08:16 am
Published on:
25 Jan 2025 08:02 am

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