
रायचूर. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ रायचूर के वर्षावास अंतर्गत आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैन समणी डॉ. सुयशनिधि ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि राग, द्वेष, क्रोध, मोह और अहंकार से मुक्ति में निहित है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता विवेक के साथ जीने का नाम है, जबकि स्वच्छंदता मन की प्रत्येक इच्छा के पीछे भागना है। डॉ. सुयशनिधि ने कहा कि मर्यादा जीवन के लिए बंधन नहीं, बल्कि सुरक्षा कवच है। पटरी छोडऩे वाली रेल और किनारे छोडऩे वाली नदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि नियम और संयम ही जीवन को सही दिशा देते हैं। उन्होंने भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि सबसे बड़ी विजय किसी दूसरे पर नहीं, बल्कि स्वयं पर विजय है। क्रोध, मान, माया और लोभ पर नियंत्रण पाने वाला व्यक्ति ही वास्तविक स्वतंत्रता का अनुभव कर सकता है। तिरंगे के तीन रंगों को सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र से जोड़ते हुए उन्होंने आत्मिक स्वतंत्रता का संदेश दिया। जैन समणी सुयोगनिधि ने 105 तपस्वियों से सती यंत्र स्तोत्र का पाठ कराया। घंटाकर्ण महावीर मंत्र जाप के बाद डॉ. सुयशनिधि ने ध्यान कराया। रविवार की युवा जागरण श्रृंखला में कर्म और भविष्य पर चिंतन कराया जाएगा। मंच संचालन पवन नाहर ने किया।
Updated on:
16 Aug 2026 06:01 am
Published on:
16 Aug 2026 06:01 am
