भारत में केन्द्र सरकार इसे राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की तर्ज पर देश भर के मेडिकल कॉलेजों में आने वाले 600 मरीजों को उपलब्ध कराएगी। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इसे जारी भी कर दिया है। सामान्य टीबी का बढ़ता हुआ स्तर एमडीआर टीबी है। अगर एमडीआर टीबी नियंत्रित नहीं होती है तो मरीज एक्सट्रीम ड्रग रेजिस्टेंस (एक्सडीआर) टीबी की ओर बढ़ जाता है।
प्रारंभिक और एक्सडीआर टीबी में असरहीन
यह दवा केवल फेफड़ों के एमडीआर टीबी के लिए है। प्रारंभिक टीबी और एक्सडीआर टीबी में यह काम नहीं करती। हृदय के मरीजों के लिए इसे इस्तेमाल में लाते वक्त सावधानी बरतनी होगी। यह दवा एटीपी सिन्थटैस इन्हीबीटर है, जो टीबी के बैक्टीरिया के मेटाबोलिजम पर आक्रमण कर उसे खत्म कर देती है। यह अपनी तरह की पहली दवा है, जो कुछ ही दिनों में बैक्टीरियल एनर्जी को पूरी तरह समाप्त कर देती है।
नई दवा की खुराक
यह दवा खाने के बाद दी जाएगी। पहले दो सप्ताह 400 मिली ग्राम (एमजी) रोज, इसके बाद दो सप्ताह तक 200 एमजी दिन में तीन बार, 300 एमजी सप्ताह में तीन दिन, इसके बाद 6 से 24 महीने तक 600 एमजी सप्ताह में एक बार दी जाएगी। इस दवा के साथ एमडीआर टीबी की 3-4 उपलब्ध दवाइयां भी देनी होगी।
18 से 24 माह के लिए
श्वांस रोग संस्थान के डॉ. नरेन्द्र खिप्पल ने बताया कि शुरुआत में यह दवा सुपरवाइज्ड थैरेपी की तरह टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की तर्ज पर 18 से 24 महीने के लिए दी जाएगी। दो साल बाद दवा के परिणामों का आंकलन कर दवा को पूरे भारत में उपलब्ध करवाया जाएगा। नई दवा से एमडीआर टीबी के इलाज में मदद मिलेगी।
पिछले साल 2.20 लाख मरे
भारत में वर्ष 2015 में टीबी से 2.20 लाख लोगों की मौत हुई। डबल्यूएचओ के अनुसार टीबी के मरीज भारत में सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद चीन और इंडोनेशिया में हैं। भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा टीबी से संक्रमित है।
ये रखें विशेष ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार टीबी के मरीजों को खांसते समय विशेष ध्यान रखना चाहिए। एक टीबी का मरीज एक साल में 12 से 15 लोगों को संक्रमित कर देता है।