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टोल बचाने का ये है जोरदार तरीका, लोग उठा रहे फायदा, अपनाएं ये ट्रिक्स

टोल रोड से सफर तय करने वाले वाहन चालक टोल टैक्स से बचने की ‘गली’ तलाश रहे हैं।

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जयपुर

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Jyoti Kumar

May 29, 2023

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जयपुर। टोल रोड से सफर तय करने वाले वाहन चालक टोल टैक्स से बचने की ‘गली’ तलाश रहे हैं। जिसके सरकार को नुकसान हो रहा है। पैसे बचाने के लिए लोग मोबाइल ऐप का उपयोग कर रहे हैं। इसमें गूगल मैप भी लोगों को पैसे बचाने में मदद कर रहा है। जिसमें लोगों को टोल रोड और बिना टोल टैक्स वाली राह दिखा रहा है। कई वाहन चालकों ने इन्हीं ऐप्स का इस्तेमालकर पैसे बचा रहे हैं। ऐसा वो लोग ज्यादा करते हैं जो नियमित रूप से टोल रोड से गुजरते हैं। हालांकि, लोग कई बार इसके साइड इफेक्ट से भी पीड़ित हुए। जितना टोल देना पड़ता, उससे ज्यादा तो ईंधन की खपत हो गई। लम्बा रास्ता और खराब सड़क से भी दो-चार होना पड़ रहा है।

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झोटवाड़ा निवासी मनोज गोयल प्राय: सीकर और उसके आगे राष्ट्रीय राजमार्ग से सफर करते हैं। बीच में दो टोल आते हैं। उन्होंने गूगल मैप से बिना टोल रोड का रास्ता खोजा। इससे 3 से 4 किमी दूरी ज्यादा नापनी पड़ी, लेकिन आने-जाने में 120 रुपए बचा लिए। अजमेर के लिए भी ठिकरिया गांव से निकल रहे हैं। खराब सड़क से जाना पड़ता है।

पृथ्वीराज नगर निवासी मांगीलाल शर्मा मेहंदीपुर बालाजी आते-जाते थे। पहले आगरा रोड पर राजाधोक टोल से ही निकलते रहे, लेकिन अब ऐप के जरिए बिना टोल रोड का विकल्प खोजा। बस्सी चक से बस्सी, चरणवास होते हुए रूट दिखाई दिया। इससे वापस आगरा रोड पहुंचे। लेकिन नुकसान हो गया। लंबा चक्कर लग गया और समय व पेट्रोल भी ज्यादा लगा।

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मैप का यह फीचर, लेकिन टोल देना भी जरूरी
गूगल मैप पर जब भी कोई रास्ता खोजते हैं तो वह सबसे कम समय लेने वाला रूट दिखाता है। कई बार रूट में हाईवे, टोल टैक्स भी शामिल होते हैं। हालांकि, गूगल मैप्स की सेटिंग्स में टोल से बचने के विकल्प चुनने के बाद दूसरा रास्ता भी दिखाई देता है। कई बार बिना टोल वाला रूट भी उतने ही समय वाला होता है, जितना की टोल वाला रूट।

ज्यादातर टोल रोड पर सुगम राह मिलती है। इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। टैक्स के रूप में थोड़े से पैसे बचाने के लिए ऐसे वैकल्पिक रास्ते कहां तक सही है। दूसरा पहलू यह भी है कि चारों तरफ टोल रोड का जाल फैल है। 100 किलोमीटर की दूरी नापने में ही दो से तीन टोल प्लाजा से गुजरना पड़ता है। सरकार भी कंपनियों को कई साल तक टोल टैक्स
वसूलने का अधिकार दे देती है, जबकि निर्माण लागत काफी पहले ही वसूली जा चुकी होती है।