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Best Janmashtami Jhanki in Rajasthan: जन्माष्टमी का पर्व पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है वहीं राजस्थान में इसकी रौनक कुछ अलग ही होती है। यहां के प्रमुख मंदिरों में न केवल विशेष श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं बल्कि भव्य झांकियां और सजावट भी देखने लायक होती हैं।
मंदिरों में हजारों श्रद्धालु एकत्र होते हैं और रात 12 बजे तक कान्हा के जन्म के स्वागत के लिए भजन-कीर्तन, आरती और कृष्णलीला में भाग लेते हैं। जयपुर, कोटा, सीकर और खाटू जैसे शहरों के प्रसिद्ध मंदिरों में इस अवसर पर भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ता है। आइए जानते हैं उन प्रमुख मंदिरों के बारे में जहां जन्माष्टमी पर सबसे खास सजावट और झांकियां सजाई जाती हैं।
इस सूची में सबसे पहला नाम आता है जयपुर के आराध्य देव गोविंद देव जी का। जन्माष्टमी की पूर्व संध्या से ही मंदिर परिसर रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजा नजर आता है। भक्त सुबह 4 बजे से ही मंगला आरती के लिए कतार में लग जाते हैं। इस साल मंदिर में मथुरा-वृंदावन की तर्ज पर कान्हा का भव्य स्वागत किया जाएगा। रात 12 बजे भगवान के जन्म के साथ 31 तोपों की सलामी और भव्य आतिशबाजी भी होगी।
जयपुर का ISKCON मंदिर भक्ति और नवीनता का अनूठा संगम है। जन्माष्टमी के दिन यहां रंग-बिरंगे फूलों से सजे झूले, दिव्य झांकियां और आकर्षक रोशनी हर भक्त का मन मोह लेती है। थाईलैंड और मलेशिया से खास तौर पर ऑर्किड और रजनीगंधा के फूल मंगवाए गए हैं जिनसे विशेष श्रृंगार किया जाएगा। रात 12 बजे तक हरे कृष्ण-हरे राम का जाप चलता रहता है। अभिषेक के बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और उन्हें झांकी में सजाया जाता है। इसके बाद चरणामृत व प्रसाद वितरित किया जाता है और भक्तों को फलाहार भी कराया जाता है।
कोटा का श्री मथुराधीश जी मंदिर वल्लभ संप्रदाय का प्रमुख केंद्र है, और जन्माष्टमी के दिन यह भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो उठता है। रात 12 बजे ठाकुर जी के प्राकट्य (जन्म दर्शन) के साथ पंचामृत अभिषेक होता है। जागरण और भव्य झांकी भी आयोजन का हिस्सा होते हैं। अगले दिन नंदोत्सव के रूप में विशेष उत्सव मनाया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध तीर्थों में से एक खाटूश्याम जी मंदिर में जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन होता है। रात 12 बजे विशेष आरती होती है और पूरे मंदिर परिसर में दिव्य झांकी सजाई जाती है। भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और भक्तों का उत्साह इस पर्व को अविस्मरणीय बना देता है। यहां की सजावट और भक्तिभाव हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है।
चित्तौड़गढ़ के मंडफिया गांव में स्थित सांवलिया सेठ मंदिर में जन्माष्टमी पर खास आयोजन होते हैं। कान्हा के जन्म पर रात 12 बजे कई किलो का मावे का केक काटा जाता है। मंदिर में भव्य आतिशबाजी होती है और रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। भगवान की दिव्य झांकी को देखने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
Updated on:
16 Aug 2025 01:12 pm
Published on:
16 Aug 2025 08:14 am
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