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‘जाने क्या दिख जाए’ के दिन ढले, अब कहेंगे ‘पधारो म्हारे देस’

प्रदेश में आने वाले पर्यटकों का स्वागत अब फिर से 'पधारो म्हारे देस' कहकर किया जाएगा। 'अब जाने क्या दिख जाए' कहीं नहीं दिखेगा।

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Vishvendra Singh

जयपुर। प्रदेश में आने वाले पर्यटकों का स्वागत अब फिर से 'पधारो म्हारे देस' कहकर किया जाएगा। 'अब जाने क्या दिख जाए' कहीं नहीं दिखेगा। पिछली सरकार ने यह स्लोगन बदल दिया था, जिसको लेकर पर्यटन विभाग के कर्मचारियों से समक्ष लोगों ने नाराजगी भी व्यक्त की थी। हालांकि अब परम्परागत स्लोगन नए रूप में दिखेगा।

विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए इसमें अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। पुराने स्लोगन को नया कैसे किया जाए, इसके लिए लोगों से ऑनलाइन सुझाव भी मांगे जाएंगे। पर्यटन मंत्री शुक्रवार को सरकार द्वारा चलाए जा रहे होटलों को देखने पहुंचे। दोपहर करीब 3 बजे उन्होंने अधिकारियों के साथ होटल खासा कोठी में बैठक की। इस दौरान उन्होंने होटलों की वर्तमान स्थिति, होटलों से होने वाले राजस्व सहित अन्य विषयों पर चर्चा की।

बीती सरकार में बंद हुए होटल-मोटल होंगे शुरू !
पर्यटन मंत्री ने बीती सरकार में बंद किए गए होटल-मोटल को चालू करने की मंशा भी दिखाई है। निगमों की कर्मचारी यूनियनों से भी वार्ता कर इस दिशा में सुझाव देने को कहा है। उन्होंने आगामी दिनों में राजस्थान स्थित होटलों और राजस्थान पर्यटन विकास निगम की इकाइयों को शीघ्र लाभ का केंद्र बनाने के एक्शन प्लान का प्रजेंटेशन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वे होटल जयपुर, होटल तीज व गणगौर में भी वयवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे। राजस्थान पर्यटन विकास कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष तेज सिंह राठौड़ ने कहा कि मंत्री और सचिव का रवैया सकारात्मक है।

प्रचार-प्रसार पर खर्चे थे 250 करोड़
राजस्थान पर्यटन को देशभर में बढ़ावा देने के लिए विभाग की ओर से 1993 में तत्कालीन निदेशक ललित के पंवार ने 'पधारो म्हारे देस' स्लोगन दिया गया। 2007 तक यही स्लोगन चलता रही। 2008 में बदलकर कलरफुल राजस्थान किया गया, लेकिन प्रचार प्रसार न होने की वजह से लोगों की जुबां पर पुराना स्लोगन ही रहा। जनवरी, 2016 में विभाग ने 'जाने क्या दिख जाए' कर दिया। इसके प्रचार-प्रसार में सरकार ने 250 करोड़ से अधिक रुपए खर्च कर दिए।