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हर साल उर्स में सजती है भाईचारे से परिपूर्ण कला की जाजम

इमरान शेख़/जयपुर के संसार चंद्र रोड स्थित मीरजी का बाग़ दरगाह में हिन्दू-मुस्लिम को जोड़ती परंपरा भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा दे रही है। दरगाह में आयोजित होने वाले सालाना उर्स के दौरान एक ही जाजम पर गंगा-जमुनी संस्कृति के रंग खुशबू बिखेर रहे हैं।

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जयपुर

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Imran Sheikh

Jul 17, 2023

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इमरान शेख़/जयपुर के संसार चंद्र रोड स्थित मीरजी का बाग़ दरगाह में हिन्दू-मुस्लिम को जोड़ती परंपरा भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा दे रही है। दरगाह में आयोजित होने वाले सालाना उर्स के दौरान एक ही जाजम पर गंगा-जमुनी संस्कृति के रंग खुशबू बिखेर रहे हैं। प्रदेश में इस अनूठी परंपरा को कलाकार भी बखूबी निभा रहे हैं। दरगाह पर हजरत सैय्यद महबूब उर रहमान नियाज़ी के तीन दिवसीय उर्स में आध्यात्म से परिपूर्ण भक्ति गायन और वादन के साथ ही ध्रुवपद गायन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

गूंज उठा अंकित का सितार
उर्स के दौरान रविवार देर रात्रि आध्यात्मिक माहौल के बीच शहर के जाने-माने कलाकारों ने अपनी संगीतमय प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में पद्मश्री सारंगी नवाज उस्ताद मोइनउद्दीन खान, सितार वादक अंकित भट्ट, ध्रुवपद गायक रहमान हरफनमौला और ग़ज़ल गायक जावेद हुसैन सहित कई कलाकारों ने बारी-बारी से अपने गायन वादन की प्रस्तुतियों से अकीदतमंदों को लुभाया। कार्यक्रम में जयपुर के तेजी से उभरते सितार वादक अंकित भट्ट ने राग दरबारी को अपनी प्रस्तुति का माध्यम बनाया। उन्होंने इसमें गायकी अंग के माध्यम से श्रोताओं पर अधिक प्रभाव छोड़ा।

गा उठी मोइनउद्दीन खान की सारंगी
पद्मश्री सारंगी नवाज उस्ताद मोइनउद्दीन खान ने जैसे ही सारंगी के तारों को छूआ तो संगीमय माहौल बन पड़ा। इस बीच उन्होंने राग मारू बिहाग को अपनी प्रस्तुति का माध्यम बनाया। इसमें उन्होंने विलंबित एक ताल और द्रुत ताल तीन ताल में अपनी सुरीली प्रस्तुति देकर अंकीदतमंदों को रिझाया। उनके गायन में गायकी अंग प्रभावी रहा। करीब डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति में उनके साथ साबिर ख़ान ने भी सारंगी पर अपने सबक को पेश किया। उनके साथ तबले पर मेहराज हुसैन ने सधि हुई संगत की।

रहमान की गायकी में खुदा का 'जिक्र'
ध्रुवपद गायक रहमान हरफनमौला ने अपनी गायकी में अनोखा प्रयोग करते हुए ख़ुदा की इबादत में आलाप को जिक्र का माध्यम बनाया। उन्होंने राग मालकौंस और राग तोड़ी में विभिन्न रचनाओं को सुरीले अंदाज में पेश किया। उनके गायन में धैर्य और गंभीरता साफ झलकी। उनके साथ पखावज पर पं.प्रवीण आर्य के शिष्य व पुत्र ऐश्वर्या आर्य ने लुभावनी संगत की। अंत में जावेद हुसैन ने अपने साथियों के साथ मिलकर ग़ज़ल गायन पेश किया। उनके साथ में हारमोनियम पर रहबर हुसैन ने खूबसूरत लहरा दिया।

सजेगा सूफियाना कलामों का गुलदस्ता

दरगाह सज्जादा नशीन डॉ.हबीब उर रहमान नियाज़ी ने बताया कि मुल्क के हालात को देखते हुए उर्स में शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम को शामिल किया गया है। संगीत के जरिए आपसी रिश्तों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कलाकार और कला का कोई मजहब नहीं होता। पिछले साल की तरह इस साल भी हिन्दू-मुस्लिम कलाकारों ने आध्यात्मिक संगीत की प्रस्तुतियां दीं। तीन दिवसीय उर्स के दूसरे दिन सूफियाना कलामों का गुलदस्ता सजाया जाएगा। जिसमें महफिल-ए-क़व्वाली में रामपुर के अलावा बॉलीवुड फेम साबरी बंधु और अनवार हुसैन नियाज़ी एंड पार्टी अपने-अपने कलाम पेश करेगी। तीसरे दिन कुल की रस्म के साथ उर्स का समापन होगा।