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ट्रांस फैट के जहर को साफ करने में जुटा डब्ल्यूएचओ

दुनियाभर के लोगों में मोटापे और डायबिटीज की समस्या बढ़ रही है।
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जयपुर

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Kiran Kaur

May 31, 2018

trans fat

ट्रांस फैट के जहर को साफ करने में जुटा डब्ल्यूएचओ

दुनियाभर के लोगों में मोटापे और डायबिटीज की समस्या बढ़ रही है। इसी को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने क्रमबद्ध तरीके से भोजन में से ट्रांसफैट को समाप्त करने का निर्णय लिया है। डब्ल्यूएचओ चाहता है कि ग्लोबल फूड सप्लाई में से आर्टिफिशियल ट्रांस फैट को वर्ष 2023 तक हटा लिया जाए। इसी के मद्देनजर डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में रिप्लेस नाम से एक अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान दुनियाभर के देशों में आर्टिफिशियल ट्रांस फैट को खाद्य पदार्थों से पूरी तरह हटाने के लिए दिशा-निर्देश देेगा। डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि हर साल ट्रांस फैट के सेवन से हृदय संबंधी बीमारियों के कारण पांच लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया के ज्यादातर विकसित देशों ने पैक्ड फूड या प्रोसेस्ड फूड में ट्रांस फैट की एक निश्चित मात्रा को निर्धारित करके इस फैट पर अंकुश लगाने का काम किया है। जबकि कुछ देशों की सरकारों ने हाइड्रोजिनेटेड ऑयल्स को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। ये इंडस्ट्रीज में बनने वाले आर्टिफिशियल ट्रांस फैट का प्रमुख स्रोत होते हैं। इन तमाम प्रयासों के बावजूद अब भी दुनिया के कई विकासशील देशों में ट्रांस फैट को लेकर जागरूकता का अभाव है। कोई भी फैट, जो तेल के हाइड्रोजिनेशन प्रक्रिया से तैयार किया गया हो, ट्रांस फैट कहलाता है। उदाहरण के लिए वनस्पति घी, इन्हें ट्रांस फैटी एसिड भी कहते हैं।

प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश
वर्ष 2004 में दुनिया में डेनमार्क ऐसा पहला देश बना जिसने औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इससे पहले यहां हर साल 50 हजार लोग ट्रांस फैट के कारण हृदय रोगों के खतरे में रहते थे।
प्रतिबंध के चार साल बाद ही पाया गया कि इससे यहां हृदय रोग से होने वाली मौतों में 14.2 फीसदी की कमी हो गई।

रिप्लेस
रिव्यू: औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के खाद्य स्रोत और उनके संबंध में आवश्यक नीतियों का निर्माण करना।
प्रमोट: औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के स्थान पर हेल्दी फैट और तेलों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना।
लेजिस्लेट: औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट को खत्म करने के लिए नियमों को लागू करना।
एक्सेसस: खाद्य आपूर्ति में ट्रांस फैट की निगरानी करना और लोगों में ट्रांस फैट की खपत में परिवर्तन का पता लगाना।
क्रिएट: नीति निर्माताओं, उत्पादकों, आपूर्तिकर्ताओं और जनता के बीच ट्रांस फैट के नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरुकता बढ़ाना।
एन्फोर्स: नीतियों और नियमों का पालन करवाना।
सबसे पहले न्यूयॉर्क ने हटाई हानिकारक वसा
न्यू यॉर्क दुनिया का पहला ऐसा शहर है, जिसने एक दशक पहले औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस वसा को हटा दिया था। स्वास्थ्य की रक्षा और जीवन बचाने के लिए भोजन में से ट्रांस फैट को कम करना जरूरी है क्योंकि हर साल इसकी वजह से विश्व में पांच लाख से ज्यादा मौतें होती हैं। इस संबंध में सबसे ज्यादा विकासशील देशों में जागरूकता को बढ़ावा देना जरूरी है क्योंकि सस्ते होने की वजह से यहां पर इस फैट का सबसे ज्यादा उपभोग किया जाता है। ऐसा पहली बार हुआ है कि वैश्विक स्वास्थ्य अधिकारी अंतत: देशों को अपने पूरे खाद्य आपूर्ति से हानिकारक तेलों को हटाने के लिए कह रहे हैं। अमरीका में फूड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य निर्माताओं के लिए जून, 2018 की समयसीमा तय कर दी है कि वे अपने उत्पादों से आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेलों के रूप में कृत्रिम ट्रांस वसा को पूरी तरह से हटा दें। वर्ष 2006 में एफडीए ने खाद्य निर्माताओं को न्यूट्रिशन फैक्ट लेबल पर ट्रांस वसा की मात्रा लिखना अनिवार्य कर दिया था। इसमें एक बिंदु यह था कि 0.5 फीसदी से कम फैट होने पर लिखना अनिवार्य नहीं था और उत्पाद को जीरो फीसदी फैट की अनुमति मिलने लगी लेकिन यहीं ट्रांस फैट भोजन में जगह बनाने में कामयाब हुआ।

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