
जयपुर। जयपुरिया अस्पताल में ट्रोमा सेंटर बनकर तैयार हो चुका है। मार्च में यह ट्रोमा सेंटर शुरू हो जाएगा। वर्तमान में एसएमएस अस्पताल में सबसे बड़ा ट्रोमा सेंटर है। अब इसके समकक्ष दूसरा ट्रोमा सेंटर जयपुरिया अस्पताल में बना है। जो आधुनिक सुविधाओं से लैस है। ट्रॉयल के तौर पर ट्रोमा को शुरू कर दिया गया है। कल सोमवार से ट्रॉयल के तौर पर ट्रोमा को शुरू कर दिया गया है। लेकिन पूरी तरह से ट्रोमा मार्च से शुरू होगा। यह ट्रॉमा पांच सौ वर्गगज में यह ट्रोमा सेंटर बनकर तैयार हुआ है। कल सोमवार को रोड सेफ्टी डिर्पाटमेंट के अधिकारियों ने विजिट किया था। इसके साथ ही अभी डॉक्टर व अन्य को लेकर आरयूएचएस को अवगत कराया गया है। ताकी मार्च में पूरी तरह से ट्रोमा को शुरू किया जा सके। बहरहाल ट्रोमा को ट्रॉयल के तौर पर शुरू किया गया है।
ट्रोमा में यह है खास..
ट्रोमा सेंटर के इमरजेन्सी में 20 बैड, ऑपरेशन थिएटर में 2 टेबल, आईसीयू में 4 बैड है। भर्ती होने से लेकर दवा, जांच और इलाज की सुविधा एक ही छत के नीचे है। सोनोग्राफी, ईसीजी, एक्सरे, पैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री जांच सुविधा है। न्यूरो, आर्थोपेडिक सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर 24 घंटे सातों दिन तैनात रहेंगे। मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा। इसके लिए सभी सिस्टम विकसित किए गए है।
एसएमएस अस्पताल पर होगा दबाव कम..
जयपुर जिले में हर साल तीन हजार से ज्यादा दुर्घटनाएं होती है। जिसमें लगभग एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत होती है। इसके अलावा हजारों की संख्या में घायल आते है। मरीजों का यह भार एसएमएस के ट्रोमा सेंटर पर होता है। लेकिन अब जयपुरिया अस्पताल में ट्रोमा सेंटर शुरू होने के बाद एसएमएस अस्पताल में ट्रोमा सेंटर पर मरीजों का दबाव कम होगा।
इनका कहना है...
ट्रोमा सेंटर बनकर तैयार हो चुका है। यह आधुनिक सुविधाओं से लैस है। अभी ट्रॉयल शुरू कर दिया गया है। मार्च में पूरी तरह से शुरू कर दिया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद एसएमएस अस्पताल में मरीजों का भार कम होगा।
डॉ महेश मंगल
अधीक्षक, जयपुरिया अस्पताल
Published on:
07 Feb 2024 12:09 pm
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