
जयपुर। अब प्रदेश की सड़कों पर मनमाने आकार के ट्रक नहीं दिखाई देंगे। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए 1 अप्रेल से ट्रक बॉडी कोड लागू होगा। इसका ड्राफ्ट दो साल पहले ही तैयार किया जा चुका था, लेकिन सरकार को ट्रांसपोर्टर्स के विरोध में इसकी तारीख बार-बार बढ़ानी पड़ी।
प्रदेश में 600 से ज्यादा ट्रक बॉडी निर्माता हैं, लेकिन लाइसेंस प्रक्रिया की जटिलता के कारण अब तक 35 लाइसेंस ही मिल पाए हैं। जिनको लाइसेंस मिले, वे कंपनियां हैं। हालांकि अब बड़े ट्रक बॉडी निर्माता इस कोड को जल्द से जल्द लागू करने के पक्ष में हैं।
भारी भरकम फीस
प्रदेश में केवल 50 ऐसे ट्रक बॉडी निर्माता हैं, जिनके पास सम्पूर्ण संसाधन है और वे इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईकैट) और एआरएआई में आवेदन कर चुके हैं। बाकी बचे 550 से ज्यादा ट्रक बॉडी निर्माता इस प्रक्रिया के जटिल होने के
चलते आवेदन ही नहीं कर रहे हैं। इसके आवेदन की फीस 12 लाख रुपए से ज्यादा है। हालांकि राज्य की ट्रांसपोर्ट यूनियन व अन्य बड़े ऑटोमोटिव डीलर्स इनके लिए आईकैट से बैठक कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा निर्माताओं को लाइसेंस मिल सके।
अब पलायन का भी खतरा
यह कारोबार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 12 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। प्रदेश में हर साल 1500 से 2000 ट्रक ट्रेलर बॉडी बनाई जाती हैं। कोड लागू होने के बाद करीब 5000 लोग इस उद्योग से पलायन कर सकते हैं और अन्य बचे लाइसेंस ले चुकी कंपनियों में जा सकते हैं। हाल ही में एक बड़ी कंपनी ने जयपुर में प्लांट भी लगाया है।
क्या है कोड
ट्रक बॉडी कोड के जरिए ट्रक की बॉडी के स्टैंडर्ड तय किए जाने हैं। इन स्टैंडर्ड को मोटर व्हीकल रजिस्ट्रेशन एक्ट ( एमवीआरए) में शामिल किया जाएगा। ट्रक के रजिस्ट्रेशन के वक्त ट्रक बॉडी के स्टैंडर्ड का ध्यान रखा जाएगा।
अभी क्या है व्यवस्था
अभी कंपनियों द्वारा ट्रक के अलग-अलग लोड कैपिसिटी के आधार पर चैसिस तैयार किए जाते हैं। ट्रांसपोर्टर्स ये चेसिस खरीदकर बाहर ट्रक की बॉडी तैयार करवाते हैं। हालांकि अलग-अलग लोड कैपिसिटी के हिसाब से कुछ डिजाइन उपलब्ध हैं, लेकिन बॉडी कोड नहीं होने के कारण ट्रांसपोर्टर्स इनमें फेरबदल करा लेते हैं।
दुर्घटनाओं के कारण बनते हैं ट्रक
ट्रकों की मौजूदा बॉडी के कारण अक्सर दुर्घटनाएं हो रही हैं। ज्यादा से ज्यादा सामान ले जाने के लिए ट्रांसपोर्टर्स कैपिसिटी से बड़ी बॉडी बनवा लेते हैं। इससे ट्रक पलटले की घटनाएं होती हैं। यह भी शिकायत रहती है कि बाहर जो ट्रक बॉडी बिल्डर्स काम कर रहे हैं, उनके पास तकनीकी जानकारी भी नहीं होती है और वे बॉडी में हल्के सामान का इस्तेमाल करते हैं। यह भी दुर्घटना का कारण बनता है।
ये कोड लागू होता है तो सरकार का राजस्व बढ़ेगा और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
-हरमीत सिंह मेहंदीरत्ता, अध्यक्ष, राजस्थान ट्रेलर मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन
हम ज्यादा से ज्यादा निर्माताओं को लाइसेंस लेने के लिए जागरूक कर रहे हैं, इसके लिए लगातार आईकैट से संपर्क बनाए हुए हैं।
-विनोद अग्रवाल, गंगानगर मोटर्स
Updated on:
14 Mar 2018 10:00 am
Published on:
14 Mar 2018 09:57 am
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