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Tulsi Vivah 2020 पूजा में चढ़ाई जा चुकी तुलसी का दोबारा इस तरह कर सकते हैं उपयोग, जानें तुलसी तोड़ने के नियम

कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी या देव उठनी ग्यारस मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ तुलसी की भी पूजा की जाती है। विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से तुलसी का विवाह कराया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित एमके शर्मा के अनुसार यह पर्व दरअसल तुलसी की महत्ता भी बताता है।

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 Dev Prabodhini Ekadashi 2021

Dev Prabodhini Ekadashi 2021

जयपुर. कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी या देव उठनी ग्यारस मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ तुलसी की भी पूजा की जाती है। विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से तुलसी का विवाह कराया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित एमके शर्मा के अनुसार यह पर्व दरअसल तुलसी की महत्ता भी बताता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि तुलसी के पत्ते कभी भी अकारण नहीं तोड़ना चाहिए। इसके साथ ही सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए। रविवार और शुक्रवार को भी तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित किया गया है। शास्त्रों के अनुसार सप्तमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि पर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।

वर्जित किए गए तिथियों—वारों में तुलसी के झड़े हुए पत्तों का उपयोग करने का विधान है। इन तिथियों—दिनों से एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख सकते हैं। खास बात यह है कि पूजा में चढ़े हुए तुलसी के पत्तों को धोकर फिर से पूजा में उपयोग में लाया जा सकता है। नियमित तुलसी के सेवन से यादृदाश्त तेज होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि ऐसी अनेक औषधीय गुणों के कारण घर में तुलसी लगाने की परंपरा आज भी निभाई जा रही है। देव उठनी ग्यारस पर तुलसी रोपने पर विष्णुलोक में स्थान मिलने की बात कही गई है। इस दिन सुबह स्नान के बाद तुलसी को जल चढ़ानें और तुलसीजी से पूजन करने पर दस हजार जन्मों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।