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Study : सोने में परेशानी या नींद के बार-बार टूटने पर बढ़ जाता है टाइप 2 डायबिटीज का खतरा

सावधान : ऑस्ट्रेलिया में अपने किस्म के पहले शोध ने लोगों को चेताया
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जयपुर

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Aryan Sharma

Dec 07, 2022

Study : सोने में परेशानी या नींद के बार-बार टूटने पर बढ़ जाता है टाइप 2 डायबिटीज का खतरा

Study : सोने में परेशानी या नींद के बार-बार टूटने पर बढ़ जाता है टाइप 2 डायबिटीज का खतरा

मेलबर्न. स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचने के लिए हर दिन 7 से 8 घंटे की नींद (Sleep) जरूरी है। अगर किसी को सोने में परेशानी होती है या नींद बार-बार टूटती है, तो इससे टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) का खतरा बढ़ जाता है। एक नए शोध के बाद यह चेतावनी दी गई है।
यह शोध यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं (University of South Australia researchers) ने किया। शोधकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया (Australia) के ऐसे 1,000 वयस्कों पर अध्ययन किया, जिनकी औसत उम्र 44.8 साल थी। नींद आने में परेशानी, नींद की अवधि, एफिशिएंसी और लेंथ वेरिएबिलिटी जैसे तथ्यों पर डेटा इकट्ठा किया गया। इसके आधार पर शोध का परिणाम तैयार किया गया। इसके मुताबिक जिन लोगों को नींद आने में परेशानी होती है, उनका बॉडी मास इंडेक्स (Body mass index), कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) और इन्फ्लेमेशन (Inflammation) ज्यादा होता है। ये समस्याएं टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ाती हैं।

पर्याप्त नींद जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि लोगों को बीमारियों से बचने के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद लेनी चाहिए। फेस्टिव सीजन में नींद को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। अधिकतर लोग फेस्टिवल के माहौल में नींद पर ध्यान नहीं देते। शोध रिपोर्ट में बताया गया कि जिन लोगों को सोने में परेशानी होती है, उनकी कार्डियोमेटाबॉलिक हेल्थ खराब हो जाती है। साथ ही इन्फ्लेमेशन, कोलेस्ट्रॉल और वजन बढ़ने की समस्या पैदा होती है।

रिस्क फैक्टर
यह अपनी तरह का पहला शोध है, जिसमें नींद और डायबिटीज के कई पहलुओं को कवर किया गया। शोधकर्ता डॉ. लीसा मैट्रिकियानी के मुताबिक नींद के विभिन्न पहलू डायबिटीज के रिस्क फैक्टर से जुड़े हुए हैं।