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UIDAI ने 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार निष्क्रिय किए, ठगी पर लगेगी लगाम

Deceased Aadhaar: देशभर सहित राजस्थान में भी पहचान फ्रॉड पर लगेगी रोक। यह कदम भारत की डिजिटल गवर्नेंस को फ्रॉड-प्रूफ बनाने में बड़ा योगदान है। परिवार मृतक के आधार निष्क्रिय करवाने के लिए myAadhaar पोर्टल या 1947 हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Feb 05, 2026

Identity Fraud: जयपुर: आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है, जिसमें लगभग 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं। आधार डेटाबेस की सटीकता और अखंडता बनाए रखने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान के तहत अब तक 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए हैं।

यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में लिखित जवाब में दी। हालांकि लोकसभा के जवाब में राज्यवार जानकारी नहीं है। फिर भी राजस्थान पत्रिका ने राजस्थान से जुड़े कुछ मामलों में जानकारी जुटाई है।

राजस्थान सरकार ने भीजन आधार फेशियल वेरिफिकेशन सख्त किया है। UIDAI का यह अभियान मृत आधार निष्क्रिय कर पेंशन फ्रॉड रोक रहा है, जिससे सरकारी खजाने की बचत हो रही है और सही लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित हो रही है। राजस्थान में लाखों अपात्र/मृत पेंशनधारकों की पेंशन पहले रोकी जा चुकी है, और रिकवरी जारी है। यह कदम भारत की डिजिटल गवर्नेंस को फ्रॉड-प्रूफ बनाने में बड़ा योगदान है। परिवार मृतक के आधार निष्क्रिय करवाने के लिए myAadhaar पोर्टल या 1947 हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं।

राजस्थान में आए कई मामले सामने

यह कदम विशेष रूप से राजस्थान जैसे राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं (वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग) में मृतकों के नाम पर बड़े पैमाने पर फ्रॉड सामने आए हैं। राजस्थान में 90 लाख से अधिक पेंशनर हैं, और आधार लिंकेज अनिवार्य होने से मृत्यु के बाद भी आधार सक्रिय रहने पर पेंशन जारी रहती थी, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता था।

राजस्थान में फ्रॉड के प्रमुख उदाहरण

जालोर जिले में बड़ा घोटाला: डिजिटल वेरिफिकेशन में पता चला कि 15 हजार से अधिक मृत पेंशनधारकों के नाम पर 300 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि वितरित हो चुकी थी। पूरे राज्य में 3 लाख से अधिक फर्जी पेंशनधारक सक्रिय थे, जिनमें मृतकों का बड़ा हिस्सा था।

मृतकों के नाम पर करोड़ों का दुरुपयोग: कई जिलों में परिवार या बिचौलिए आधार-लिंक्ड बैंक खातों से पैसे निकालते रहे। मृत्यु पंजीकरण और आधार डेटा में मिसमैच से फ्रॉड आसान हो जाता था।

उम्र बदलकर फर्जी पेंशन: ई-मित्र संचालकों और गिरोहों ने आधार में जन्मतिथि मैनिपुलेट कर युवाओं को वृद्धावस्था पेंशन दिलाई। डूंगरपुर-बांसवाड़ा जैसे जिलों में फर्जी आधार बनवाकर अपात्र लाभार्थी शामिल किए गए।

साइबर ठगी का नया रूप: ठग "जीवन प्रमाण पत्र अपडेट" के नाम पर पेंशनधारकों से आधार-लिंक्ड OTP मांगते और बैंक खाते से पैसे उड़ा लेते। राजस्थान पुलिस ने बार-बार अलर्ट जारी किए।

UIDAI के उपायों से राजस्थान को लाभ

  • बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक और फेस ऑथेंटिकेशन लाइवनेस डिटेक्शन से अनधिकृत उपयोग रुकता है।
  • ऑफलाइन QR कोड, e-Aadhaar और नया आधार ऐप से सुरक्षित सत्यापन संभव।
  • कोर बायोमेट्रिक डेटा कभी साझा नहीं होता; एन्क्रिप्टेड स्टोरेज अनिवार्य।
  • नियमित डुप्लीकेशन हटाना और जनसांख्यिकीय अपडेट केवल प्रमाणित दस्तावेजों से।