
राजस्थान भाजपा की सबसे कद्दावर नेता और दो बार की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे आज अपना जन्मदिवस मना रही हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें 'मास लीडर' माना जाता है, जिनकी एक आवाज पर लाखों की भीड़ जुट जाती है। ग्वालियर के राजघराने में जन्मीं और धौलपुर की बहू बनीं वसुंधरा राजे ने राजस्थान को अपनी कर्मभूमि बनाया और यहाँ की राजनीति के केंद्र में रहीं।
वसुंधरा राजे का जन्म मुंबई में ग्वालियर के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया और राजमाता विजयाराजे सिंधिया के घर हुआ था। उनका विवाह धौलपुर के महाराज राणा हेमंत सिंह से हुआ। हालांकि यह रिश्ता ज्यादा समय नहीं चला, लेकिन वसुंधरा ने धौलपुर को कभी नहीं छोड़ा और वहीं से अपने राजनीतिक सफर की नींव रखी।
साल 2003 में वसुंधरा राजे ने राजस्थान के राजनीतिक इतिहास को बदल दिया। उन्होंने प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके नेतृत्व में भाजपा ने पहली बार 120 सीटों का जादुई आंकड़ा पार किया था।
2003 के चुनावों से पहले उन्होंने पूरे राजस्थान में 'परिवर्तन यात्रा' निकाली थी। धूल भरी सड़कों पर साधारण वेशभूषा में जनता के बीच जाना और उनकी भाषा में बात करना, वसुंधरा के इस अंदाज ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
मुख्यमंत्री बनने से पहले वसुंधरा राजे राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा चेहरा थीं। वे झालावाड़ से लगातार 5 बार (1989-2003) लोकसभा सांसद रहीं। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने विदेश राज्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी संभाली।
उनके कार्यकाल को जनहितैषी योजनाओं के लिए याद किया जाता है। 'भामाशाह योजना' के जरिए उन्होंने महिलाओं को घर का मुखिया बनाया और बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा। वहीं 'मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान' ने राजस्थान के सूखे क्षेत्रों में जल क्रांति लाने का काम किया।
वसुंधरा राजे अपनी धार्मिक आस्था के लिए जानी जाती हैं। वे अक्सर अपने जन्मदिन पर त्रिपुरा सुंदरी (बांसवाड़ा) या सालासर बालाजी के दर्शन करती हैं। वे मानती हैं कि उनकी शक्ति का स्रोत जनता का प्यार और देवी का आशीर्वाद है।
राजनीति के अलावा वसुंधरा राजे अपने ड्रेसिंग सेंस के लिए भी चर्चा में रहती हैं। उनकी लहरिया और बांधनी साड़ियां राजस्थान की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं। वे जहाँ भी जाती हैं, वहां की स्थानीय संस्कृति को अपने पहनावे में जरूर शामिल करती हैं।
2013 में जब भाजपा ने राजस्थान में 163 सीटें जीती थीं, तब वसुंधरा की रणनीतिक सूझबूझ का लोहा पूरे देश ने माना। कठिन समय में भी धैर्य न खोना और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद करना उन्हें एक 'आयरन लेडी' की छवि देता है।
यूएनओ (UNO) ने साल 2007 में उन्हें 'विमेन टुगेदर अवॉर्ड' से सम्मानित किया था। यह सम्मान उन्हें राजस्थान में महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए किए गए उनके कार्यों के लिए दिया गया था।
अपने हालिया संबोधन में भी राजे ने कहा है कि जनता के दिलों में जगह बनाना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज भी जब वे किसी क्षेत्र में जाती हैं, तो बुजुर्ग उन्हें आशीर्वाद देते हैं और युवा उनसे प्रेरणा लेते हैं।
Updated on:
8 Mar 2026, 10:26 AM IST
Published on:
8 Mar 2026, 10:26 AM IST
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