
low floor
जयपुर।
चुनावी साल में राज्य सरकार ने पहाड़ों पर निर्माण की गली खोल दी है। शहरी इलाकों में पहाड़ों पर हो रहे बेतरतीब निर्माण रोकने के नाम पर मॉडल विनियम 2018 लागू कर सरकार ने यह छूट दी है। इसमें सड़क की मध्य रेखा से 15 डिग्री कम और इससे ज्यादा ढलान वाले पहाड़ों की परिभाषा तय कर वहां निर्माण अनुमति देने की छूट दी गई है।
साठ डिग्री व अधिक ढलान क्षेत्र तक में भी निर्माण की अनुमति देने का प्रावधान कर दिया गया है। इसमें पहाड़ों की दो श्रेणी की गई है जहां मोटल्स, रिसोर्ट, एम्यजुमेंट पार्क, कैम्पिंग साइट और फार्म हाउस का निर्माण हो सकेगा। इसके लिए नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग दोनों ने संयुक्त रूप से मॉडल विनियम जारी कर दिए हैं। नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी के स्वीकृति के बाद इन्हें लागू किया गया है।
इस विनियम के पीछे सरकार ने पहाड़ों पर बेतरतीब निर्माण रोकने, विधिवत निर्माण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने का तर्क दिया है। इसमें वन विभाग क्षेत्र के पहाड़ शामिल नहीं हैं। अभी तक नगरीय क्षेत्र में शामिल पहाड़ों पर निर्माण के लिए किसी प्रकार के नियम-कायदे लागू नहीं थे। माउंटआबू पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अलग से बायलॉज लागू हैं।
दो तरह की धरातल श्रेणी
- विनियमों के तहत 2 तरह के धरातलों की श्रेणी तय की गई है।
- सड़क की मध्य रेखा से 15 डिग्री कम ढलान के ऊंचे-नीचे क्षेत्र को पहाड़ नहीं माना गया है। इस श्रेणी की भूमि पर भवन निर्माण की अनुमति प्रचलित भवन विनियमों के अनुसार ही मिलेगी। यहां तहखाना निर्माण की भी अनुमति होगी।
- दूसरी श्रेणी में 15 डिग्री से अधिक ढलान वाली भूमि शामिल की गई है। ये पहाड़ की श्रेणी में आएंगे। इसमें मास्टर प्लान में दर्शाया गया पहाड़ी पौधरोपण क्षेत्र और पहाड़ी संरक्षण क्षेत्र भी शामिल है।
15 डिग्री से अधिक ढलाने वाले पहाड़ों के लिए
- मोटल्स, रिसोर्ट, एम्यजुमेंट पार्क, कैम्पिंग साइट और फार्म हाउस का निर्माण हो सकेगा।
- यहां अधिकतम आच्छादित क्षेत्र 20 प्रतिशत होगा, यानी 100 वर्गगज जमीन है तो 20 प्रतिशत पर निर्माण की अनुमति होगी।
- इसमें से बाकी क्षेत्रफल के न्यूनतम 50 प्रतिशत क्षेत्र पर हरित क्षेत्र विकसित करना होगा।
- इसमें से शेष में 50 प्रतिशत क्षेत्र पर 150 पौधे प्रति हैक्टेयर लगाए जाएंगे।
- 3 से 6 मीटर तक पहुंच मार्ग होने पर भूतल व एक मंजिल का निर्माण हो सकेगा।
- 6 मीटर से अधिक व 9 मीटर तक पहुंच मार्ग होने पर भूतल व दो मंजिल तक निर्माण हो सकेगा।
- 9 मीटर से अधिक पहुंच मार्ग होने पर भूतल व तीन मंजिल (अधिकतम 15 मीटर तक)।
- यहां तहखाना निर्माण की अनुमति नहीं होगी।
- उपयोग के अनुसार पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी।
- पहाड़ी संरक्षित क्षेत्र में पहाड़ से लगती 30 मीटर चौड़ी पौधरोपण पट्टी आरक्षित करनी होगी।
- अधिकतम 12 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण हो सकेगा।
- 47 डिग्री से अधिक 60 डिग्री से कम ढलान पर अधिकतम आच्छादित क्षेत्र 15 प्रतिशत होगा।
- 60 डिग्री व अधिक ढलान पर अधिकतम आच्छादित क्षेत्र 10 प्रतिशत रहेगा।
- प्राकृतिक नालों को अवरुद्ध नहीं कर सकेंगे।
- वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का निर्माण आवश्यक।
दण्डात्मक प्रावधान
पहाड़ों के लिए जारी हुए मॉडल विनियम में पहाड़ों के संरक्षण का भी प्रावधान किया गया है। विनियमों की पालना नहीं करने वालों के खिलाफ दण्डात्मक प्रावधान भी लागू किए गए हैं। खासकर निर्धारित मापदण्ड अनुरूप निर्माण नहीं होने पर उसे ध्वस्त किया जा सकेगा। भवन निर्माण स्वीकृति स्वमित्व का आधार नहीं होगी। सभी निकायों को अपने यहां अधिकृत स्वीकृति लेकर इन्हें लागू करना होगा।
Published on:
10 May 2018 07:18 am
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