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Vasundhara Raje : भाजपा स्थापना दिवस पर वसुंधरा राजे का ‘पावरफुल’ संबोधन, जानें क्या कहीं 10 बड़ी बातें?

जयपुर स्थित प्रदेश मुख्यालय में आयोजित संगोष्ठी में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जब माइक संभाला, तो उन्होंने संगठन की नींव से लेकर वर्तमान चुनौतियों तक पर ऐसी बेबाक राय रखी कि हॉल तालियों से गूँज उठा।

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Vasundhara Raje

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भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर जयपुर स्थित प्रदेश मुख्यालय में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुई इस संगोष्ठी में प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। वसुंधरा राजे का संबोधन इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रहा, जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं को 'मूल विचारधारा' और 'निष्ठा' का पाठ पढ़ाया।

वसुंधरा राजे के संबोधन की 10 बड़ी बातें :

1. पार्टी को मां मानें, पद को भूल जाएं

राजे ने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी को अपनी मां मानना चाहिए। उन्होंने नसीहत दी कि "अपना काम करो, पद अपने आप आएगा। पद को भूल जाइए, केवल काम करिए और पार्टी के लिए लड़ने से कभी डरें नहीं।"

2. सब कुछ नेतृत्व पर न छोड़ें

उन्होंने कहा कि आज हम मजबूत हाथों (पीएम मोदी) में हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ उन पर छोड़ दिया जाए। इस 'वट वृक्ष' को जिंदा रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है।

3. दलबदलुओं से खतरे की चेतावनी:

राजे ने साफ शब्दों में कहा, "पार्टी को खतरा दलबदलुओं से है। नियुक्ति और दायित्व केवल उन्हें मिलने चाहिए जिनकी संगठन के प्रति निष्ठा, रिश्ता और संस्कार पुराने हों।"

4. अटल जी का 'चिमटा' वाला सिद्धांत:

राजे ने अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि अटल जी कहते थे— "सत्ता के लिए किसी को तोड़कर लाना पड़े, तो मैं उसे चिमटे से भी नहीं छूऊंगा।" उन्होंने मूल विचारधारा वाले कार्यकर्ताओं के सम्मान पर जोर दिया।

5. हार की संभावना के बावजूद लड़ा पहला चुनाव:

राजे ने याद किया कि इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद जब सहानुभूति लहर थी, तब राजमाता ने उन्हें चुनाव लड़ने को कहा। राजे नाराज थीं कि हारने के लिए क्यों उतारा जा रहा है, लेकिन माता की आज्ञा मानकर उन्होंने चुनाव लड़ा और हार स्वीकार की।

6. राजमाता का कठिन संघर्ष:

उन्होंने बताया कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया 30 दिन में से 28 दिन दौरे पर रहती थीं। सुबह 3 बजे उठकर पूजा करना और फिर बिना प्लेन, ट्रेन या अच्छी सड़कों के गाँव-गाँव घूमना उनकी दिनचर्या थी।

7. पद की लालसा का अभाव:

राजे ने कहा कि उस दौर में कोई पद का लालची नहीं था। अटल जी और आडवाणी जी राजमाता को अध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने अपने गुरु महाराज की आज्ञा न मिलने पर पद ठुकरा दिया।

8. चुनाव जीतना नहीं, दिल जीतना लक्ष्य:

राजे ने कहा कि भाजपा केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रही, हमने हमेशा लोगों का दिल जीतने की कोशिश की है।

9. पीएम मोदी का वैश्विक उजास:

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने 'अखंड ज्योत' की तरह दुनिया में उजास पैदा किया है। आज पूरी दुनिया चिंतित है, लेकिन भारत निश्चिंत है।

10. शून्य से शिखर तक का सफर:

राजे ने उन सभी पूर्वजों को नमन किया जिन्होंने पार्टी के लिए बलिदान दिया और भाजपा को शून्य से शिखर तक पहुँचाया।

संगठन की 'मजबूत जड़ों' पर जोर

वसुंधरा राजे का यह संबोधन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। विशेष रूप से 'दलबदलुओं' और 'मूल कार्यकर्ताओं के सम्मान' वाली उनकी टिप्पणी को राजस्थान की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी तभी मजबूत रहेगी जब उसके कार्यकर्ता संस्कारित और निष्ठावान होंगे।