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Veer Tejaji Mandir Vandalized Case: नेताओं ने छुड़वाया… लेकिन पुलिस के शिकंजे से छूटना नहीं आसान, जानें क्यों

Tejaji Temple in Jaipur: हिरासत में लिए गए लोग शांतिभंग करने के मामले में भले ही गिरफ्तार होने से बच गए हो। लेकिन, सांगानेर थाने में दर्ज मुकदमे गले की फांस बने हुए है।

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जयपुर। प्रताप नगर सेक्टर-3 स्थित वीर तेजाजी मंदिर में मूर्ति खंडित करने और उत्पात मचाने के मामले में हिरासत में लिए गए लोगों को नेताओं के दबाव में छोड़ दिया गया। लेकिन कहते है ना कि पुलिस के शिकंजे में एक बार आने के बाद आसानी से नहीं छूटा जा सकता।

हिरासत में लिए गए लोग शांतिभंग करने के मामले में भले ही गिरफ्तार होने से बच गए हो। लेकिन पुलिस ने सांगानेर थाने में दर्ज किए गए मुकदमों में उत्पात मचाने के आरोप में नामजद व अन्य अज्ञात को आरोपी बनाया है। पुलिस ने भीड़ के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए हैं।

इनमें एक मुकदमा पुलिस ने खुद और दूसरा पेट्रोल पंप के प्रतिनिधि की तरफ से दर्ज किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस की तरफ से दर्ज मुकदमे पुलिस स्वयं बंद नहीं कर सकती। इस मुकदमे को बंद करने के लिए सरकार के उच्च स्तर पर निर्णय लेना पड़ता है।

पहला: निरीक्षक ने दर्ज कराया

थानाधिकारी श्रीनिवास जांगिड़ ने धारा 191 (2), 190, 121(1), 132, 285 बीएनएस व 3 पीडीपीपी एक्ट व 8 नेशनल हाईवे एक्ट में मामला दर्ज किया। पुलिस ने घटना के विरोध में बबलू चौधरी, विकास, नमन शर्मा चतराला, हेमराज, विष्णु शर्मा, मनीष अग्रवाल, अंकित चतराला, सुनील, विवेक, कुणाल, पूरण माली सेक्टर 64, विनोद माली श्योपुर रोड, रामस्वरूप यादव, राजू यादव व यशवन्त धाकड, अरविन्द, सुरेश, नवदीप, हंसराज, छोटू चौधरी, कुलदीप, जसवन्त, खुशीराम, श्रवण चौधरी, श्योजीराम, राजेन्द्र, कृष्ण, नीरज, कैलाश जाट, नरेश चौधरी, लोकेन्द्र सिंह गायत्री नगर को नामजद व अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। भीड़ ने राहगीर राकेश शर्मा के साथ मारपीट की और पथराव में उप निरीक्षक पुष्पा, हेड कांस्टेबल कृष्ण लाल, कांस्टेबल मंगू सिंह, अमरीश के चोटें आई। पुलिस ने मौके पर से कुछ लोगों को शांतिभंग करने के मामले में गिरफ्तार किया।

दूसरा मामला: पेट्रोल पंप मैनेजर ने दर्ज कराया

प्रताप नगर सेक्टर-3 स्थित पेट्रोल पंप के मैनेजर रमेश ने सांगानेर थाने में दर्ज कराया। रिपोर्ट में बताया कि अज्ञात भीड़ ने पेट्रोल पंप पर तोड़फोड़ की और आग लगाने का प्रयास किया। इस पर धारा 191(2), 190, 326 (छ), 62 बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की। इस मामले का अनुसंधान भी मालवीय नगर एसीपी आदित्य पूनियां कर रहे हैं।

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इनका कहना है

कोर्ट चाहे तो किसी भी केस को सिर्फ इसलिए बंद नहीं होने दे सकता कि सरकार या पुलिस ऐसा चाहती है। अगर कोर्ट को लगे कि गंभीर अपराध हुआ है या जांच जरूरी है, तो वह केस को आगे बढ़ाने का आदेश दे सकता है।
-दीपक चौहान, अधिवक्ता, राजस्थान हाई कोर्ट

मूर्ति तोडऩे और उसके बाद उत्पात मचाने के संबंध में कुल तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनका अनुसंधान किया जा रहा है। अनुसंधान में आने वाले तथ्यों के अनुसार कार्रवाई होगी।
-तेजस्वनी गौतम, डीसीपी ईस्ट, जयपुर कमिश्नरेट

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