
पशुचिकित्सा महाविद्यालय, जयपुर को पशुचिकित्सा परिषद की मिली मान्यता
जयपुर। प्रदेश में अब पशुचिकित्सा सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी। हाल ही राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर के संघटक पशुचिकित्सा महाविद्यालय, जयपुर (पी.जी.आई.वी.ई.आर.) की स्नातक डिग्री को भारतीय पशुचिकित्सा परिषद् की प्रथम अनुसूची में शामिल किया गया है। भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग की भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के तहत पशुचिकित्सा महाविद्यालय, जयपुर को वेटरनरी कौंसिल ऑफ इंडिया (वी.सी.आई.) की अनुसूची में शामिल किया गया है। वेटरनरी कौंसिल ऑफ इंडिया की सलाहकार समिति की अभिशंषा के बाद यह नोटिफिकेशन मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी किया गया है। अब हर साल जयपुर के स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, जामडोली से 80 पंजीकृत पशु चिकित्सक तैयार होंगे। इससे पशु चिकित्सा सेवाएं और अधिक मजबूत होंगी।
वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने इस निर्णय को एक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे केन्द्र एवं राज्य सरकार से अनुदान और सहायता राशि मिलने का रास्ता प्रशस्त हो गया है। अब इस महाविद्यालय का चहुंमुखी विकास संभव हो सकेगा। कुलपति ने संस्थान के सभी संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को उनके प्रयासों एवं टीम वर्क के लिए बधाई दी है।
पशुचिकित्सा महाविद्यालय, जयपुर के भारतीय पशुचिकित्सा परिषद् की पहली अनुसूची में सम्मिलित होने की खबर से यहां के विद्यार्थी भी खुश नजर आए। कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि इस महाविद्यालय, जयपुर द्वारा प्रदत् डिग्रीधारक विद्यार्थी अब देश के उच्च ख्याति प्राप्त शिक्षण संस्थानों में प्रवेश ले सकेंगे।
पशुचिकित्सा महाविद्यालय, जयपुर के वी.सी.आई. की प्रथम अनुसूची ने शामिल होने के साथ ही वेटरनरी विश्वविद्यालय के तीनों संघटक महाविद्यालय बीकानेर, जयपुर और नवानियां (उदयपुर) वी.सी.आई की प्रथम अनुसूची में शामिल हो गए हैं।
Updated on:
23 Apr 2020 03:20 pm
Published on:
23 Apr 2020 10:03 am
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