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प्रत्याक्षी की छवि देखकर ही करें मतदान

बुजुर्गों ने राजनीति में शुद्धिकरण महाभियान का सराहा

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जयपुर . राजस्थान पत्रिका की ओर से संचाालित चेंजमेकर अभियान को एरिया में जबर्दस्त सपोर्ट मिल रहा है। इसी के तहत वैशाली नगर पत्रिका की ओर से निर्माण नगर में वरिष्ठ नागरिक परिषद के सदस्यों से राजनीति में सफाई मुद्दे पर बातचीत की।

वर्तमान में राजनीति का स्तर इतना नीचे जा चुका है कि कोई पढ़ा-लिखा व्यक्ति राजनीति में जाना ही नहीं चाहता। यदि किसी को राजनीति ज्वॉइन करने को कह दिया जाता है तो वह इसे अपनी तौहीन समझता है। इसका कारण है कि राजनीति भ्रष्टाचारियों और आपराधिक बैकग्राउंड के लोगों की सैरगाह बन गई है। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि पत्रिका ने राजनीति में शुद्धीकरण का जो यह अभियान चलाया है इसे पूरी तरह सफल होने में भले ही समय लग जाए लेकिन आगामी चुनावों पर इसकी छाया अवश्य दिखाई देगी।

एजुकेशन क्राइटेरिया व उम्र की सीमा तय हो

वक्ताओं ने कहा कि एक तो राजनीति में आने के लिए एजुकेशन क्राइटेरिया बने और दूसरा उम्र की सीमा भी तय हो। इनके अनुसार एमपी और एमएलए का चुनाव लडऩे वाला उम्मीदवार कम-से-कम स्नातक तो होना ही चाहिए। साथ ही निर्वाचन आयोग को चाहिए कि राजनीति में सक्रिय रहने की उम्र सीमा भी 70 वर्ष निर्धारित कर दे। इसका फायदा ये होगा कि नए लोगों तथा युवाओं को मौका मिलेगा। वोटर को भी चाहिए कि वह किसी पार्टी विशेष से नहीं बंधे। बल्कि प्रत्याशी का आचरण और उसकी स्वच्छ छवि देख कर मतदान करे। साथ ही ऐसे व्यक्ति को चुनें जो सदैव उनके बीच आसानी से उपलब्ध हो सके और जिसे अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं का भी ज्ञान हो।

जनता के पास हो विदड्रॉल पावर

वरिष्ठ जनों ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद कई नेता मतदाताओं का अपनी शक्ल भी नहीं दिखाते। ऐसे में जनता के पास यदि विदड्रॉल पावर हो तो जनता अपने अधिकार का उपयोग करते हुए उसे वापस पद से हटा सकती है। इसलिए यदि जनता को ये अधिकार दे दिया जाए तो राजनीति में काफी हद तक शुद्धता आ सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तो कोई सभ्य घर की महिला दूषित राजनीति में आना ही नहीं चाहती लेकिन ये अवश्य है कि यदि शिक्षित महिलाएं राजनीति में आ जाएं तो इसकी कायापलट होते देर नहीं लगेगी। वरिष्ठ नागरिकों ने वंशवाद, धनबल और बाहुबल को राजनीतिक भ्रष्टाचार का कारण बताते हुए भी अपनी चिंता प्रकट की।