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कबाड़ बड़ा कारोबार: आपकी रद्दी तो ‘रद्दी’, भंडार तक पहुंचे तो बन जाए ‘सोना’!

क्या आपको पता है कि आपके हाथ से निकली रद्दी आगे किस भाव से बिकती है? जानेंगे तो आप चौंक उठेंगे।

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waste and Scrap iron big business in rajasthan

जयपुर। क्या आपको पता है कि आपके हाथ से निकली रद्दी आगे किस भाव से बिकती है? जानेंगे तो आप चौंक उठेंगे। आप जो रद्दी 11 से 14 रुपए प्रति किलो के भाव से देते हैं, वह बड़े भण्डारों तक पहुंचकर 36 से 42 रुपए किलो तक बिक रही है।

दरअसल, आपके घर से निकलने वाला रद्दी, लोहा, प्लास्टिक आदि कबाड़ अब बड़े कारोबार का रूप ले रहा है। राज्य में प्रतिदिन लगभग 64 करोड़ का कारोबार हो रहा है लेकिन कबाड़ के बदले में लोगों को मिल रही राशि नहीं बढ़ी है।

रद्दी और स्क्रेप लोहे के लिए निगरानी तंत्र ही नहीं
प्लास्टिक, सॉलिड वेस्ट, ई-वेस्ट सहित अन्य स्क्रेप के लिए सरकार ने निगरानी तंत्र बनाया हुआ है। इन्हें खरीदने से लेकर रिसाइकिल प्रक्रिया तक की दर तय की जाती है। लेकिन कागज की रद्दी और स्क्रेप लोहे का बड़ा करोबार होने के बावजून इनकी रिसाइकिल प्रक्रिया की निगरानी के लिए तंत्र ही नहीं है। ऐसे में आमजन को उचित दर नहीं मिल पा रही है।

इस तरह हो रहा उपयोग
विषय विशेषज्ञों के मुताबिक एक टन रद्दी कागज के रिसाइकिल से 60 प्रतिशत कोयले की बचत होती है। साथ ही 43 प्रतिशत ऊर्जा और 70 प्रतिशत पानी (जो लकड़ी से कागज बनाने में उपयोग होता है) और लगभग 70 प्रतिशत कच्चे माल की बचत होती है। लोहे को रिसाइकिल करने से भी लगभग इसी तरह का फायदा हो रहा है। रिसाइकिल से नया कागज बनाकर अच्छे दाम पर बेचा जा रहा है। इसी तरह स्क्रेप लोहे से सरिया, एंगल, लोहे की पत्ती बनाई जा रही है। ज्यादातर संबंधित व्यापारी ही स्क्रेप लोहा खरीदकर रिसाइकिल कर रहे हैं।

ये भी मुख्य वेस्ट
- प्लास्टिक वेस्ट: हर दिन 480 टन प्लास्टिक वेस्ट निकल रहा है। इसके निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जमीन बेकार हो रही है और जानवरों के लिए मुसीबत बढ़ रही है।

- म्युनिसिपल वेस्ट: राज्य में प्रतिदिन 6 हजार टन म्युनिसिपल वेस्ट (रसोई का कचरा) निकल रहा है। इसके निस्तारण की भी पूरी व्यवस्था नहीं। इस कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल फटकार तक लगा चुका है।
- कंपोस्टेबल वेस्ट: यह प्लास्टिक, कपड़े की कतरन और कुछ कागज का मिला-जुला वेस्ट है। राज्य में यह रोजाना 1550 टन निकल रहा है। इसका कुछ भाग ईंधन के रूप में काम आ रहा है।

राजस्थान में 4 जगह 7 मिल
जयपुर के कालाडेरा सहित कोटा, अजमेर व धौलपुर में रिसाइकिल मिल हैं। राज्य के कई हिस्सों से यहां रद्दी पहुंचती है। अकेले कालाडेरा में 7 और बाकी शहरों में एक-एक मिल संचालित है। राज्य में लोहे को रिसाइकिल करने का बड़ा काम जयपुर में हो रहा है।

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बीच में इतनी कमाई
कबाड़ —— आपसे खरीद —— भण्डारों तक पहुंचकर

रद्दी —— 11 से 14 रुपए प्रति किलो —— 36 से 42 रुपए प्रति किलो
लोहा —— 15 से 21 रुपए प्रति किलो —— 45 रुपए तक प्रति किलो

(आमजन के लिए दोनों ही कबाड़ की कीमत ज्यादा नहीं बढ़ी है, जबकि बाजार में इनकी मांग बढ़ रही है)

कितना बड़ा कारोबार
- 1600 टन रद्दी (पैकेजिंग, अखबार, स्टेशनरी व अन्य) निकल रही है राज्य में प्रतिदिन

- 31 हजार टन स्क्रेप लोहा निकल रहा है रोजाना राज्य में
- 7 से 8 हजार टन स्क्रेप लोहा अकेले जयपुर में निकल रहा प्रतिदिन

- 64 करोड़ का कारोबार हो रहा है राज्य में कबाड़ का रोजाना

रिसाइकिल के लिए कहां कितना जा रहा वेस्ट
मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश): 45 प्रतिशत
मोर्बी (गुजरात): 43 प्रतिशत
राजस्थान: 12 प्रतिशत

कागज, प्लास्टिक, लोहा सभी को रिसाइकिल कर उपयोगी बनाने का काम तेजी से हो रहा है। यह व्यवसाय का बड़ा जरिया बन रहा है और पर्यावरण के लिए बेहतर भी है। लोगों को इस वेस्ट का पूरा दाम मिलना चाहिए। अभी घर से फैक्ट्री के बीच दाम में बड़ा अंतर है।
- मीनाक्षी जैन, क्लाइमेट चेंज व रिसाइकिल संबंधी शोधकर्ता

प्लास्टिक वेस्ट के निस्तारण की हम लगातार निगरानी कर रहे हैं लेकिन कागज और लोहे से जुड़ी प्रक्रिया मंडल के स्तर पर पास नहीं होती।
- वीके सिंघल, मुख्य अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण मंडल


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