
निजी फर्म को वर्क आर्डर से तीन महीने की अवधि में फील्ड में तैनात करनी थी मोबाइल वाटर टेस्टिंग लैब
जयपुर। जानलेवा गर्मी के दौर के साथ प्रदेश में पीने के पानी का संकट गहरा रहा है तो कई इलाके प्रदूषित जल से प्रभावित है। दूसरी तरफ प्रदेश के बाशिंदों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराने के सरकारी दावों की पोल अब खुलने लगी है।
जलदाय विभाग ने तीस करोड़ लागत का ठेका निजी फर्म को दिया जिसमें फर्म को प्रदेश के करीब दो दर्जन जिलों में जाकर सीधे फील्ड से पानी सैंपलों की जांच का जिम्मा दिया गया लेकिन फर्म वर्क आॅर्डर मिलने के बाद से कुंभकर्णी नींद सो रही है। वहीं आम जनता प्रदूषित पानी का उपयोग करने पर विवश है।
मालूम हो विभाग के वर्क आर्डर के अनुसार निजी फर्म को प्रदेश के 22 जिलों में फील्ड में जाकर मौके पर ही पानी की गुणवत्ता जांच का काम करना था। वर्क आर्डर के अनुसार फर्म को मार्च के पहले सप्ताह तक फील्ड में मोबाइल वाटर टेस्टिंग लेबोरेट्री भेजनी थी, लेकिन तय अवधि के दो महीने बाद भी विभाग की स्टेट रेफरल सेंटर लेबोरेट्री प्रशासन को मोबाइल लैब को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है।
मामले में जानकारी लेने पर लैब प्रशासन ने फर्म को फील्ड मे अब तक मोबाइल लैब नहीं भेजने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही है।
इनका कहना है—
फील्ड में मोबाइल वाटर टेस्टिंग लैब कब जाएगी इसकी मुझे जानकारी नहीं है। पहले लैब के ड्राइंग डिजाइन को लेकर भी देरी हो चुकी है। फर्म की ओर से फील्ड में कब लैब तैनात की जाएगी इसकी भी सूचना नहीं दी गई है। फर्म को कारण बताओ नोटिस शीघ्र जारी किया जाएगा। जवाब नहीं मिलने पर फर्म पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
— राकेश कुमार माथुर, चीफ केमिस्ट, स्टेट रेफरल सेंटर लेबारेट्री, जलदाय विभाग
Published on:
03 May 2018 12:59 pm
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