
भरतपुर सांसद संजना जाटव, झुंझुनूं सांसद बृजेन्द्र सिंह ओला, चूरू सांसद राहुल कस्वां। फोटो पत्रिका
MPLADS : राजस्थान में सांसद विकास निधि (एमपीएलएडीएस) को लेकर सर्दी के इस मौसम में राजनीतिक गलियारों में गरमी आ गई है। प्रदेश के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कांग्रेस के तीन सांसद संजना जाटव, राहुल कस्वां और बृजेन्द्र सिंह ओला पर आरोप लगाया कि इन तीनों सांसदों ने हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में सांसद निधि खर्च कर राजनीतिक हित साधे हैं। अब हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है कि सांसद विकास निधि (एमपीएलएडीएस) क्या है? तो आइए इसके बारे में जानते हैं
एमपीएलएडीएस या सांसद निधि योजना या संसद निधि योजना 23 दिसंबर 1993 को बनाई गई थी। इस योजना के कर्णधार कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव थे। यह केंद्र सरकार की योजना है। इस योजना में लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद और मनोनीत सांसद शामिल हैं। इसके तहत दी जाने वाली राशि से सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्य करते हैं। हर साल पूरे देश के लिए MPLADS के लिए कुल राशि लगभग 3940 करोड़ रुपए यूनियन बजट में अलग से आवंटित करता है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय फरवरी 1994 तक इस योजना पर नियंत्रण रखता था। पर उसके बाद अक्टूबर 1994 में यह सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को हस्तांतरित कर दी गई। योजना के शुरुआत में इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक सांसद को 10 लाख रुपए सहायता राशि दी जाती थी। वर्ष 1998-99 में इस राशि बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए कर दी गई थी। फिर कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने इस योजना की राशि बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दी। अभी सांसदों को 5 करोड़ रुपए मिलते हैं।
राजस्थान में कुल 35 सांसद हैं। लोकसभा के 25 सांसद और राज्यसभा से 10 सांसद हैं। ये 35 सांसद इस योजना के तहत राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दे रहे हैं।
एमपीएलएडी योजना की राशि सांसद के खाते में सीधे नहीं भेजी जाती, बल्कि संबंधित जिले के जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त या नोडल अधिकारी को 2 किस्तों में भेजी जाती है। यह राशि वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले भेज दी जाती है। सांसद निधि का उपयोग जिले में कहां करना है इस बारे में सांसद, जिला मजिस्ट्रेट को मार्गदर्शन देते हैं।
प्रत्येक सांसद इस राशि से सड़कें, स्कूल, अस्पताल, पेयजल सुविधाएं, स्वच्छता इकाइयां आदि की सिफारिश कर सकते हैं। यह योजना सांसदों को जनता की समस्याओं को सीधे हल करने का अधिकार देती है, जबकि कार्यों का क्रियान्वयन जिला प्रशासन करता है। अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्रों के लिए न्यूनतम 15 फीसदी और 7.5 फीसदी फंड आरक्षित रखना अनिवार्य है।
एमपीएलएडी योजना निधि की राशि हर वर्ष बढ़ती है। मान लीजिए अगर कोई सांसद मौजूदा वित्तीय वर्ष में पूरी राशि खर्च नहीं कर पाता है, तो बाकी राशि अगले वित्तीय वर्ष में जोड़ दी जाती है।
एमपी-लैड के मूल उद्देश्य के अनुसार नियमों के तहत सांसद को प्रतिवर्ष मिलने वाले 5 करोड़ रुपए में से अधिकतम 25 लाख रुपए ही अपने क्षेत्र के बाहर खर्च किए जा सकते हैं, जबकि आपदा की स्थिति में यह सीमा 1 करोड़ रुपए तक हो सकती है। बताया जा रहा है कि भारत सरकार ने 13 अगस्त 2024 को संसद क्षेत्र के अलावा कहीं भी राशि खर्च करने की सीमा 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दी है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 16वीं लोकसभा के सांसदों के लिए अब तक कुल 11,092.50 करोड़ रुपए की निधि जारी की जा चुकी है, जिसमें से 11,139.10 करोड़ रुपए का व्यय हो चुका है। योजना के अंतर्गत अब तक 3,84,582 कार्यों की सिफारिश की गई है।
Updated on:
06 Jan 2026 02:41 pm
Published on:
06 Jan 2026 02:35 pm
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