
जब बनते हैं यह नक्षत्र, तब माना जाता है वर्षा ऋतु का आगमन
जयपुर. प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी से 21 जून के बाद राहत मिलने की संभावना है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन हो जाएगा और इसी के साथ ग्रीष्म का समापन और वर्षा ऋतु का प्रारंभ होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्ष के छह माह सूर्य उत्तरायण और छह माह दक्षिणायन रहता है। ज्योतिषी पं. केदारनाथ दाधीच ने बताया कि सूर्य जब दक्षिणायन होता है तो उसे वर्षा ऋतु का शुभारंभ होना माना जाता है। इसके बाद 22 जून को सुबह 11.12 बजे सूर्य आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। सूर्य का आद्रा नक्षत्र में प्रवेश वर्षाकारक योग का निर्माण करता है। इसके बाद मौसम में भी परिवर्तन नजर आने लगेगा। पुरवाई हवा के साथ मौसम में जनजीवन को थोड़ी नमी महसूस होने लगेगी।
शनि की वक्र गति उगल रही आग
मौसम के संबंध में मौसम विभाग और ज्योतिषी दोनों ही अपने—अपने अनुमान लगाते रहे हैं। इस बार ज्योतिषियों की मानें तो प्रदेश में पड़ रही गर्मी शनि के प्रभाव से है। धनु राशि और मूल नक्षत्र में शनि की वक्र गति से परिभ्रमण गर्मी का कारण है। शनि मंगल ग्रह की नाड़ी में परिभ्रमण कर रहा है। मंगल अग्नि तत्व ग्रह है, इसके चलते शनि का प्रभाव मौसम में बना हुआ है। हालांकि, आगामी कुछ दिनों में शनि का प्रभाव कमजोर पड़ेगा, प्रभाव कम पडते ही गर्मी से राहत मिलना भी शुरू हो जाएगा। वहीं इस बार वर्षा का अच्छा योग भी माना जा रहा है।
देवगुरु का नक्षत्र परिवर्तन देगा राहत
22 जून को सूर्य बृहस्पति की नाड़ी आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा, तब गर्मी कम हो जाएगी। बताया गया है कि गर्मी से राहत में बृहस्पति की प्रमुख भूमिका रहेगी। देवगुरु इस समय तुला राशि में वक्री हैं और वक्र गति से ही 17 जून को विशाखा से स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। स्वाति नक्षत्र और तुला राशि दोनों जलतत्व है। इससे आसमान से राहत बरसेगी जो वर्षा का भी अच्छा संकेत माने जा रहे हैं।
Published on:
16 Jun 2018 01:24 pm
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