
पिता-पुत्र की फोटो: पत्रिका
Inspirational Father-Son Duo: क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ी और अंपायर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन मैच का बॉल टू बॉल हिसाब रखने का कार्य होता है स्कोरर का। ये काम वैसे ही जैसे सूई में धागा डालना। बल्लेबाज के रन से लेकर गेंदबाजों की एक-एक गेंद की गिनती और अनगिनत आंकड़ों को समेटने वाले स्कोरर को बाज की दृष्टि से मैच पर नजर रखनी पड़ती है। पत्रिका ने बात की स्कोरिंग में राजस्थान का नाम रोशन करने वाली पिता-पुत्र की जोड़ी राजेंद्र केवलिया और मोहित केवलिया से।
उदयपुर निवासी ये जोड़ी वर्षों से एक साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में स्कोरिंग की जिम्मेदारी निभा रही है। पिता राजेंद्र अब तक 200 प्लस मैचों में स्कोरिंग कर चुके वहीं मोहित 100 प्लस मैचों में यह जिम्मेदारी निभा चुके हैं। अगर आइपीएल की बात करें तो राजेंद्र 2008 से मैच कवर कर रहे हैं वहीं मोहित पिछले 5 वर्ष से इसमें स्कोरिंग कर रहे हैं। मैच के दौरान मोहित ऑनलाइन स्कोरिंग करते हैं तो राजेंद्र मैनुअल स्कोरिंग का जिम्मा संभालते हैं।
मोहित केवलिया के अनुसार मेरी स्कोरिंग यात्रा वर्ष 2003 में एक संयोग से शुरू हुई। मैं एक मैच खेलने गया था लेकिन टीम के 11 खिलाड़ी पूरे हो गए और मुझे 12वां खिलाड़ी बना दिया गया। तभी मैच के दौरान अचानक अंपायर को कहीं जाना पड़ा। स्कोरर को अंपायरिंग करनी पड़ी चूंकि मैं बाहर बैठा था तो स्कोरिंग का जिम्मा दे दिया गया। उस समय मुझे स्कोरिंग में कुछ नहीं आता था। फिर भी मैंने हिम्मत की और मैच के अंत तक स्कोरिंग की।
चूंकि मैं पहली बार स्कोरिंग कर रहा तो कुछ गलतियां भी हुई। फिर घर आकर पापा को सब कुछ बताया और शुरू हो गई मेरी स्कोरिंग की क्लास। मेरे स्कोरिंग कॅरियर में तीन लोगों की अहम भूमिका रही पापा, ओपी शर्मा सर और मनोज भटनागर सर। इन सभी ने मुझे स्कोरिंग की बारीकियों से रू-ब-रू करवाया। मैं आज भी इन सभी के साथ स्कोरिंग कर रहा हूं जो मेरे यादगार क्षण होते हैं।
राजेंद्र केवलिया ने वर्ष 2006 में बीसीसीआई स्तर पर स्कोरिंग की जिम्मेदारी संभाली थी। वे स्वयं क्रिकेटर रहे और वर्षों तक क्रिकेट को करीब से देखने और रिकॉर्ड करने के बाद अब वे जून 2027 में स्कोरिंग की दुनिया से रिटायर होने जा रहे हैं। राजेंद्र ने बताया कि जब मैं और मोहित साथ-साथ स्कोरिंग करते हैं अपने-अपने कार्य में जुड़े रहते हैं लेकिन मैदान के बाहर हर समय क्रिकेट पर ही चर्चा होती रहती है। इतने वर्ष हो गए स्कोरिंग करते अब तो लगता है कि स्कोरिंग जैसे खून में समा गई है। अच्छा लगता है कि मेरे बाद मोहित स्कोरिंग में मेरी उपस्थिति दर्ज कराता रहेगा। पूर्व में मैनुअल स्कोरिंग करना बहुत ही कठिन होता था पर अब जानकारी टीवी आदि से भी मिलती रहती है।
मोहित ने बताया कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं पापा के साथ स्कोरिंग करूंगा क्योंकि जब पापा ने स्कोरिंग शुरू की थी तब मैं स्कोरिंग से बहुत दूर था। मैं सीए कर रहा था। पापा से मैचों के किस्से सुना करता था। 2008 में मैंने आरसीए की स्कोरिंग परीक्षा उत्तीर्ण की उसके बाद 2012 में बीसीसीआई टेस्ट क्लियर करने के बाद निरंतर स्कोरिंग कर रहा हूं। पापा के साथ बड़े मुकाबलों में स्कोरिंग करने का अवसर मिला। अंडर-23 राजस्थान बनाम आंध्र जैसे मैचों में पापा के साथ स्कोरिंग करने का पहली बार मौका मिला था। मोहित कहते हैं अगर सीखने का जुनून हो, तो शुरुआत कहीं से भी हो सकती है।
Updated on:
16 May 2026 01:41 pm
Published on:
16 May 2026 01:39 pm
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