
जयपुर। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत‘ के विरोध को लेकर पूरे देश में चर्चा में छाई करणी सेना आखिर है कौन? इसे जानने की हर किसी की इच्छा भी है। करणी सेना की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। वर्ष 2006 में कुछ बेरोजगार राजपूत युवकों ने करणी सेना का गठन किया था जो आज राजस्थान में राजपूत समाज का चेहरा बन गया है। हालांकि यह संगठन कई धड़ों में बंट गया है। इनमें से लोकेंद्र सिंह कालवी के नेतृत्व वाली श्री राजपूत करणी सेना, अजीत सिंह ममदोली के नेतृत्व वाली श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना समिति और सुखदेव सिंह गोगामेढ़ी के नेतृत्व वाली श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना सबसे ज्यादा प्रभावी है।
राजपूतों से जुड़े मुद्दों पर शुरु हुआ था विरोध-प्रदर्शन
शुरू में इन संगठनों ने राजपूतों के हितों से जुड़े मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन किया। लेकिन बाद में ये संगठन फिल्म ‘पद्मावत‘ के विरोध में भी उतर आए। फिल्म में संजय लीला भंसाली द्वारा राजपूतों के हितो को ठेस पहुंचाने वाली बातों को लेकर ये सभी संगठन एक होकर फिल्म के विरोध में जुट गए। इन संगठनों का सबसे मजबूत स्तंभ राजपूत युवा है जो समाज के हितों के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं।
संगठन के 2 लाख सदस्य
श्री राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष नारायण सिंह दिवराला का दावा है कि उनके संगठन के दो लाख सदस्य हैं। जनवरी 2017 में जब श्री राजपूत करणी सेना के कुछ सदस्यों ने पद्मावत की शूटिंग के दौरान फिल्मकार संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट की थी तो करणी सेना के सभी गुटों में अचानक आम सहमति बन गई और सभी एकजुट हो गए।
फिल्म ‘जोधा अकबर‘ का विरोध, नहीं होने दिया था राजस्थान में रिलीज
वर्ष 2006 में करणी सेना पहली बार तब चर्चा में आई जब कालवी ने डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘जोधा अकबर‘ का विरोध किया था। करणी सेना का आरोप था कि इस फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ किया गया है। फिल्म के विरोध में राजपूतों ने जगह-जगह प्रदर्शन किए और कई जगहों पर तोडफ़ोड़ की थी। बाद में यह फिल्म राजस्थान में रिलीज नहीं हो सकी।
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गैंगस्टर आनंदपाल एकाउंटर का भी किया विरोध
राजस्थान पुलिस ने जब 2017 में राजस्थान के सबसे कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह को मार गिराया तो करणी सेना ने उसकी याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया था। आनंदपाल का एनकाउंटर राजपूत संगठनों के लिए एक मुद्दा रहा। राजपूतों ने आनंदपाल एकाउंटर के विरोध में जमकर आंदोलन किया था। ट्रेन की पटरियां उखाड़ दीं थी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
आरक्षण की मांग को लेकर कांग्रेस के चिंतन शिविर को बनाया निशाना
करणी सेना 2013 में फिर चर्चा तब आई जब आरक्षण की मांग को लेकर कांग्रेस के चिंतन शिविर को निशाना बनाया।
रानी पद्मिनी के 37वीं पीढ़ी के वंशज
एक बार फिर से उग्र हो चुकी राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह कालवी ने जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 25 तारीख आएगी और चली जाएगी, लेकिन पद्मावत नहीं आएगी। फिल्म देश में रिलीज नहीं होनी चाहिए। कालवी ने अपनी गिरफ्तारी की आशंका भी जताई। उन्होंने कहा कि शायद यह मेरी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस हो, क्योंकि मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है। पद्मावत को बैन होना चाहिए वरना लोग खुद से कफ्र्यू जैसे हालात पैदा कर देंगे। दोष किसी और का नहीं है, दोष सिर्फ भंसाली का है। कलवी ने कहा कि वो रानी पद्मिनी के 37वीं पीढ़ी के वंशज हैं। रानी ने सम्मान की खातिर 16 हजार महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था। हम क्या इतना भी नहीं कर सकते। हमसे जो बन पड़ रहा है हम कर रहे हैं। कालवी ने कहा कि वह पद्मावत को बैन करने के लिए बापू गांधी से विनती करते हैं कि वह हमें ताकत दें। जिस तरह उन्होंने अंग्रेजों को खदेड़ दिया था वैसे ही वो भी पद्मावत को बैन करवाने में कामयाब हों।
Updated on:
24 Jan 2018 04:47 pm
Published on:
24 Jan 2018 04:35 pm
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