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कौन जीतेगा राजस्थान की सुपर हॉट सीट बाड़मेर-जैसलमेर? चुनावी गर्माहट के बीच आई ये दिलचस्प ग्राउंड रिपोर्ट  

राजस्थान प्रदेश की बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला सबसे ज़्यादा चर्चा में है। यहां भाजपा के कैलाश चौधरी, कांग्रेस के उम्मेदाराम और निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र सिंह भाटी के बीच दिलचस्प मुकाबला है। 'पत्रिका' ने ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर लोगों का मन टटोला तो कई बातें निकल कर सामने आईं।

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राजेन्द्र सिंह देणोक/ बाड़मेर-जैसलमेर। चढ़ते पारे के बीच बाड़मेर-जैसलमेर की सियासत इस बार अलग ही ’रंग’ दिखा रही है। यहां न तो किसी गारंटी का असर दिख रहा, न ही कोई जादू। न कोई लहर, न ही मुद्दा। बस, राजनेताओं में बेचैनी है तो मतदाताओं की जुबां पर चुनावी चर्चा और चटकारे। यहां चुनाव अब ’जातिवाद-पार्टीवाद बनाम युवा’ की दिशा में बढ़ रहा है।

विशाल भू-भाग के कारण प्रत्याशी एक छोर से दूसरे छोर तक दस्तक देने की जद्दोजहद कर रहे हैं। बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर भाजपा-कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की रैली-सभाओं के बाद परवान चढ़े चुनावी माहौल को भांपने मैं दूसरी बार पाली से जोधपुर के रास्ते निकला।

ग्राउंड रिपोर्ट :

कल्याणपुर से पहले अराबा गांव में दो युवाओं अरविंद भारती और जितेन्द्र कुमार से मुलाकात हुई। अरविंद ने कहा कि यहां निर्दलीय की चर्चा कुछ ज्यादा है। जितेन्द्र ने कहा कि जोधपुर की औद्योगिक इकाइयों का रासायनिक पानी यहां तक पहुंच रहा है, इसका कोई समाधान नहीं।

पूरे लोकसभा क्षेत्र का दो बार राउंड करने के बाद यह सामने आया कि प्रदेश की हॉट सीट बाड़मेर में भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को जोर लगाना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत पार्टी के कई नेता और स्टार प्रचारक उनके समर्थन में सभाएं कर चुके हैं। चौधरी को मोदी के नाम से ही नैया पार लगने की उम्मीद है।

दूसरी तरफ, कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल ने भी पूरी ताकत झोंक रखी है। बेनीवाल को कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक एससी-एसटी, अल्पसंयकों के साथ जातिगत वोटों से उम्मीद है। वे बायतु विधानसभा से दो बार कम मतों से चुनाव हार चुके। बेनीवाल के प्रति जाटों का झुकाव नजर आया। आरएलपी से आए बेनीवाल के साथ कांग्रेस नेता ’मन’ से कितने साथ हैं, यह भी उनकी हार-जीत का कारण बनेगा।

मुकाबले को त्रिकोणीय बना चुके निर्दलीय रविन्द्र भाटी अपने प्रति युवाओं का झुकाव और आकर्षण बरकरार रखे हुए हैं। यह परिदृश्य अलग ही कहानी बयां कर रहा। भाटी की अब तक की स्ट्रेटेजी भी सधी हुई लगी। भाटी को राजपूत वोट बैंक के साथ मूल ओबीसी, युवा-महिला-प्रवासी और अल्पसंख्यक मतदाताओं पर भरोसा है।

धोरों में सियासी जंग, हथियार सोशल मीडिया

बाड़मेर-जैसलमेर के रेतीले धोरों में चुनावी जंग सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। प्रत्याशियों की रैली, सभा ही नहीं दिनभर की मुलाकातों का पल-पल का अपडेट दिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर लाइक-कमेंट-शेयर में प्रत्याशी एक-दूसरे को पछाड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

बालोतरा में भी सियासी चर्चा ज़ोरों पर

बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा का महत्वपूर्ण भाग है बालोतरा। यह व्यापारिक नगरी है। पचपदरा में रिफाइनरी आने से यह क्षेत्र आर्थिक धुरी बन गया। मैं बालोतरा में छतरी मोर्चा के रास्ते पहुंचा, जहां भैराराम, अमराराम और मुकेश प्रजापत से चर्चा हुई। बोले-तीनों में कड़ी टक्कर है।

जसोल में किराणा कारोबारी कांतिलाल बोले- निर्दलीय बंदे में दम तो है। नाकोड़ा में लॉरी पर गन्ना रस पीते मिले शौकत अली भी यही बात कह गए।

गुड़ा मालानी में बुद्धाराम विश्नोई बोले-भीड़ तो सभी के यहां दिख रही है, लेकिन अंदरखाने कौन-किसके साथ यह कहना मुश्किल। पचपदरा में अभिषेक राष्ट्रवाद तो कल्याणपुर में केशाराम महंगाई-बेरोजगारी के नाम पर मतदान करेंगे।