
ग्राफिक्स फोटो पत्रिका
Jaipur E-Bus : जयपुर में पिछले दिनों शुरू की गई ई-बस को लेकर भले ही सरकारी अमला अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन इनकी ही लापरवाही के कारण यह कवायद करीब छह साल देरी से शुरू हो पाई। करीब 6 वर्ष पहले जयपुर में 100 ई-बसें चलाने का अनुबंध हो गया, लेकिन दरवाजे के स्थान को लेकर कई साल तक विवाद चला और फिर अनुबंध टूट गया।
इसका खामियाजा यह रहा कि जयपुर शहर का यातायात सुधारने और प्रदूषण मुक्त करने के लिए की जा रही कवायद पर लगभग ब्रेक लग गया। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार इन बसों के लिए आए 9 करोड़ रुपए जेसीटीसीएल को मय ब्याज केंद्र सरकार को लौटाने पड़े।
गौरतलब है कि जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (जेसीटीसीएल) ने वर्ष 2019 में 300 ई-बसे चलाने का निर्णय किया था। उनमें से 100 ई-बसों को तो केंद्र सरकार ने उसी वर्ष मंजूरी भी दे दी थी।
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की गुरुवार को विधानसभा में पेश रिपोर्ट में बताया कि केंद्र के भारी उद्योग मंत्रालय ने अप्रेल 2019 में तीन वर्ष के लिए फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफॅ हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया (फेम इंडिया स्कीम) के दूसरे चरण का शुभारंभ किया, इसके लिए राज्यों से शहरी परिवहन के लिए ई-बस चलाने के प्रस्ताव मांगे गए।
जेसीटीसीएल ने 300 ई-बसों का प्रस्ताव भेज दिया, जिसके आधार पर जून 2019 में केंद्र सरकार ने 100 ई-बसों के लिए मंजूरी दे दी। इसी वर्ष अगस्त में तय किया गया कि तीन माह में बसें उपलब्ध हो जाएंगी और एक वर्ष के भीतर संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
अक्टूबर में निविदा भी जारी हो गई, जिसमें ईवी ट्रांस प्रा. लि. व टाटा मोटर्स कंपनियों ने भाग लिया। हालांकि उत्तर प्रदेश व गुजरात जैसे राज्यों से दरें अधिक होने के कारण निविदा रद्द कर दी गई।
पुन: निविदा प्रक्रिया शुरू की गई और दिसंबर 2019 में टाटा मोटर्स से अनुबंध भी हो गया, जो जून 2020 में क्रियान्वित हो गया। इसके अनुसार 90 दिन में ई-बस के प्रोटोटाइप की आपूर्ति की जानी थी, जो सितंबर में मिल गया।
प्रोटोटाइप के निरीक्षण के लिए एक समिति बनी, जिसमें अक्टूबर 2020 में रिपाेर्ट दे दी और जनवरी 2021 में पहली किश्त के रूप में 9 करोड़ रुपए का भुगतान भी हो गया। इसी बीच प्रोटोटाइप में कुछ संशोधन भी सुझा दिए गए।
पिछले दरवाजे का स्थान बदलना था, आगे के दरवाजे की ऊंचाई भी बदली जानी थी, अलग से ड्राइवर कैबिन नहीं होने व कंडक्टर सीट नहीं होने पर भी आपत्ति थी। इसके बाद बाकी संशोधन तो हो गए, लेकिन पिछले दरवाजे की जगह बदलने को लेकर मामला अटक गया।
जेसीटीसीएल चाहता था कि दरवाजा बीच में होने के बजाय पिछले पहियों के पीछे हो। दिसंबर 2022 से जून 2023 तक पत्राचार चला। इसके बाद कंपनी ने यह अनुबंध समाप्त कर दिया। इसके बाद केंद्र से मिली 9 करोड़ रुपए की राशि भी सरकार को मय ब्याज लौटानी पड़ी।
Updated on:
28 Feb 2026 08:13 am
Published on:
28 Feb 2026 08:13 am
