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जयपुर में क्यों फेल हो रहा आॅस्ट्रेलियाई शहर एडिलेड सिटी का ट्रेफिक मॉडल

जयपुर में 5 महीनों से एडिलेड ट्रेफिक मॉडल का ट्रायल चल रहा है। अब तक मिले फीडबैक के आधार पर एडिलेड सिटी का ट्रेफिक मॉडल जयपुर में फेल साबित हो रहा है। इस ट्रायल की अंतिम रिपोर्ट मार्च अंत तक आने की संभावना है।
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जयपुर

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Nitin Sharma

Mar 26, 2019

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जयपुर। राजधानी जयपुर के यातायात को बेहतर बनाने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण ने आॅस्ट्रेलिया के शहर एडिलेड सिटी का ट्रेफिक मॉडल अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। जयपुर में 5 महीनों से एडिलेड ट्रेफिक मॉडल का ट्रायल चल रहा है। अब तक मिले फीडबैक के आधार पर एडिलेड सिटी का ट्रेफिक मॉडल जयपुर में फेल साबित हो रहा है। इस ट्रायल की अंतिम रिपोर्ट मार्च अंत तक आने की संभावना है।

जेएलएन टोंक रोड पर लगे हैं ट्रेफिक सेंसर
जेडीए ने ट्रायल फेज में जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर त्रिमूर्ति सर्किल से जवाहर सर्किल तक 8 ट्रेफिक सेंसर लगाए हैं। तो टोंक रोड पर रामबाग सर्किल से गोपालपुरा बाइपास तक 5 ट्रेफिक सेंसर इंस्टॉल किए हैं। ये सेंसर जेएलएन और टोंक रोड से गुजरने वाले वाहनों का डेटा एकत्र करते हैं। साथ ही ब्लूटूथ के जरिए वाहनों को आसपास के एरिया में यातायात की स्थिति क्या है और कितना ट्रेफिक है, इसकी जानकारी देते हैं। आॅस्ट्रेलिया के शहर एडिलेड में वाहन चालकों को ट्रेफिक की जानकारी देने के लिए जगह—जगह ट्रेफिक सेंसर लगा रखे हैं।

इसलिए फेल हो रहा है आॅस्ट्रेलिया मॉडल जेडीए इंजीनियर्स का कहना है कि एडिलेड सिटी से एडॉप्ट ट्रेफिक सेंसर तकनीक जयपुर में ज्यादा उपयोगी साबित नहीं हो रही है। इसका कारण ये है कि ट्रेफिक सेंसर तकनीक ब्लूटूथ पर बेस्ड है। ट्रेफिक सेंसर सिर्फ उन्हीं वाहनों को डिटेक्ट कर पाता है, जो वाहन ब्लूटूथ इनेबल्ड है। जबकि जयपुर में ब्लूटूथ इनेबल्ड कारों और अन्य वाहनों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में ट्रेफिक सेंसर करीबन 30 से 35 फीसदी वाहनों को ही डिटेक्ट कर पाता है। जिन कारों में ब्लूटूथ लगा हैं, उन वाहनों की डिस्प्ले स्क्रीन पर यातायात की स्थिति डिस्प्ले हो रही है। ज्यादातर वाहन जिनमें ब्लूटूथ नहीं है, उनको ट्रेफिक सेंसर से कोई सिग्नल नहीं मिल रहा है। इस स्थिति को देखते हुए जेडीए ने सड़क किनारे और चौराहों पर सेंसर के जरिए यातायात की स्थिति दिखाने के लिए बड़ी स्क्रीन लगाने का प्लान बनाया था। लेकिन इससे वाहन चालक की ध्यान भटकने और यातायात बाधित होने की आशंका को देखते हुए स्क्रीन लगाने की योजना रद्द कर दी गई। जेडीए ने नवम्बर 2018 में जेएलएन और टोंक रोड पर ट्रेफिक सेंसर लगाए थे। तब से अब तक मिले फीडबैक के आधार पर एडिलेड सिटी का ट्रेफिक मॉडल नाकाम होता दिख रहा है।

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