
जयपुर . वीमन एम्पावरमेंट सिर्फ महिलाओं का इश्यू नहीं है। दरअसल ये माइंडसेट का एक इश्यू है। जिसमें सुधार होना चाहिए। हमेशा हमारा फोकस इस पर रहता है कि कितनी महिलाएं सशक्त हुईं? लेकिन मेरा मानना है कि ये थ्योरी तभी सफल हो पाएगी कि जब हम अपने माइंडसेट को इंप्रूव करेंगे। इस बात को ऐसे समझें कि जब प्रोफेशनल लेवल पर महिलाओं के डिसीजन पर जब कॉरपोरेट सेक्टर में प्रश्नचिन्ह नहीं लगेगा, तभी महिला सशक्तिकरण को साकार होते देखा जा सकेगा। फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन (फ्लो) की ओर से गुरुवार को हुए सेशन में स्पीकर और पॉलिटीशियन सचिन पायलट ने इसी तरह अपनी बात रखी। 'एम्पावरिंग हर टु ट्रांसफॉर्म इंडिया' विषय पर अपनी बात रखने आए सचिन ने कहा महिलाओं में सवाल इक्वेलिटी का नहीं है, सवाल ये है कि क्या उन्हें सेम अपॉच्र्युनिटी और रेस्पेक्ट मिल रही है या नहीं? उनकी डिग्निटी और परफॉर्मेंस को समान रूप से आंका जा रहा है या नहीं? अभी भी सेम इंटेलिजेंस, काबिलियत, मेहनत और परफॉर्मेंस के बाद भी देखने को मिलता है कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर वो रेस्पेक्ट सोसायटी में नहीं मिला पाता। हमारा ध्यान अभी भी इसी बात पर टिका है कि 30-40 परसेंट वीमन वर्र्किंग हो गई हैं। माइंडसेट चेंज हुआ है, लेकिन अभी और भी दूर जाना है।
ये गर्ल का कलर क्यों?
सोसायटी में बदलाव तभी आ सकता है जब शुरुआत से हम चीजों को जोडऩा शुरू करें। सोसायटी में अभी भी ये गल्र्स का कलर, ये बॉयज कलर, लड़कियों को ये नहीं करना चाहिए, लड़को को ये करना चाहिए जैसी बातों पर ही ध्यान है। जरूरत इन बातों से दूर हटकर हाउसहोल्ड्स और इनीशियल लेवल पर सोच के बदलाव करने की है।
सबसे बड़ा मुद्दा वीमन सिक्योरिटी
वीमन इश्यूज में सबसे बड़ा मुद्दा वीमन सिक्योरिटी का है। हम देख रहे हैं कि महिलाओं के उत्पीडऩ और सेक्सुअल अब्यूज जैसी घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। कानून के साथ ही जस्टिस श्योरटी जरूरी है। सिर्फ पॉलिटिकली एम्पावर होना काफी नहीं, कई बार ये बात सामने आती है कि राजनीति में महिलाओं को एम्पावर किया जाए, तो देश में महिलाओं की स्थिति में बदलाव देखा जा सकता है। मैं ऐसा नहीं मानता, २० साल पहले भारत, पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश में महिलाओं ने सर्वोच्च पद पर कार्य किया, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं निकलता है कि साउथ एशियन कंट्रीज, यूएस और कनाड़ा जैसे देशों से ज्यादा एम्पावर है। महिलाओं के मामले में पॉलिटिकली एम्पावर होने के बजाए सोशल एम्पावर होना जरूरी है।
ऑर्गेनाइजेशन सबसे ऊपर
एक सवाल पर पायलट ने कहा कि मैं मानता हूं कि इंडीविजुअल के बजाए ऑर्गनाइजेशन (पार्टी) को ही वोट देना चाहिए, क्योंकि पार्टी का विजन बड़ा होता है। वहीं कई बार इंडीविजुअल पर्सन की सोच से आप इत्तेफाक नहीं रखते हैं। आप किसी भी क्षेत्र या पद पर हो, लेकिन एक अच्छे व्यक्ति के तौर पर हमेशा पहचाने जाने चाहिए, क्योंकि पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन छवि ही दिल में जगह बनाती है।
मेरी मर्जी से मैंने चुना
पिता के देहांत के वक्त मेरी उम्र 21 साल थी, लेकिन परिवार की तरफ से कभी ऐसा प्रेशर नहीं था कि मुझे कोई लैगेसी को आगे लेकर चलना है। मैंने विदेश में नौकरी को छोड़कर इन दोनों प्रोफेशन को चुना।

Published on:
11 May 2018 04:20 pm
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