
पर्दा प्रथा का जोर, फिर भी संविधान निर्माण में 15 महिलाओं का योगदान
जितेन्द्र सिंह शेखावत
जयपुर. संविधान बना तब देश में पर्दा प्रथा का जोर था। फिर भी संविधान लिखने में 15 महिलाओं का योगदान रहा। जबकि आज महिला साक्षरता व सशक्तीकरण में भारी वृद्धि के बावजूद विधानसभा चुनाव में प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल भाजपा-कांग्रेस ने केवल 12 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिए हैं। संविधान निर्माण में राजस्थान का भी बड़ा योगदान रहा। संविधान सभा में राजस्थान से 12 सदस्य थे। मूल संविधान के कला से जुड़े कार्य में विश्व विख्यात कला मर्मज्ञ जयपुर के बनीपार्क निवासी कृपाल सिंह शेखावत का योगदान रहा। उन्होंने हस्तलिखित मूल संविधान के भाग एक में पहले पन्ने को कलात्मक ढंग से संवारा।
संविधान पर शोध कर रहे श्री अरविंदो सोसायटी के सचिव एडवोकेट सूर्यप्रताप सिंह राजावत के पास मौजूद संविधान की प्रति के पहले पेज की कलाकृति में बायीं ओर कृपाल सिंह के हस्ताक्षर उनकी कृति के गवाह हैं। मूल संविधान को हस्तलिपिबद्ध करने में 6 महीने लगे। इस काम में 254 पैन होल्डर व 303 नम्बर की निब काम में ली गई। संविधान में वैदिककाल के गुरुकुल, रामायण से राम-सीता, लक्ष्मण के वनवास से लौटने, श्रीकृष्ण के अर्जुन को उपदेश देने के चित्र बने हैं। गौतम बुद्ध, महावीर, विक्रमादित्य, अकबर, शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, टीपू सुल्तान व रानी लक्ष्मीबाई, महात्मा गांधी, भारतमाता को आजाद कराते हुए नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को भी संविधान में दर्शाया गया है।
संविधान सभा में राजस्थान के सदस्य
हीरालाल शास्त्री, जयनारायण व्यास, मुकट बिहारी लाल भार्गव, सरदार सिंह खेतड़ी, जसवंत सिंह, राज बहादुर, माणिक्यलाल वर्मा, गोकुललाल असावा, रामचन्द्र उपाध्याय, बलवंत सिंह मेहता, दलेल सिंह, वीटी कृष्णामचारी।
इन महिलाओं का भी रहा योगदान
सरोजिनी नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित, सुचिता कृपलानी, अम्मु स्वामीनाथन, दक्षयानी वेलायुधन, बेगम एजाज रसूल, दुर्गा बाई देखमुख, हंसा जीवराज मेहता, कमला चौधरी, लीला राय, मालती चौधरी, पूर्णिमा बनर्जी, राजकुमारी अमृत कौर, रैणुका रे, एन्नी मासकैरानी।
Published on:
26 Nov 2018 11:26 am
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