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उत्तर भारत का एकमात्र राजकीय महिला इंजीनियरिंग कॉलेज दिव्यांग बालिकाओं को स्वावलंबी बनाएगा। कॉलेज शारीरिक रूप से नि:शक्त और गरीब बालिकाओं के लिए लघु अवधि के नि:शुल्क कम्प्यूटर कोर्स प्रारंभ करेगा।
कई दिव्यांग एवं गरीब बालिकाओं को नि:शक्तता और अन्य कारणों से स्कूल, कॉलेज और तकनीकी स्तर तक पढ़ाई का अवसर नहीं मिलता। स्वावलंबी नहीं होने से कई बालिकाओं, महिलाओं को जीवन में परेशानियां होती हैं। लिहाजा राजकीय महिला इंजीनियरिंग कॉलेज ने दिव्यांग और गरीब बालिकाओं के हितार्थ नवाचार का फैसला किया है।
चलाएंगे शॉर्ट टर्म कम्प्यूटर कोर्स
दसवीं पास दिव्यांग, आंशिक स्तर पर मानसिक कमजोर और गरीब बालिकाओं के लिए कॉलेज लघु अवधि के कम्प्यूटर कोर्स शुरू करेगा। इनमें वेब डिजाइनिंग, कम्प्यूटर ऑपरेटिंग, टैली, बैंकिंग, इंश्योरेंस, इन्टरनेट और अन्य पाठ्यक्रम शामिल होंगे। इन पाठ्यक्रमों की अवधि छह महीने से एक वर्ष तक होगी। कॉलेज ऐसी बालिकाओं से कोई शुल्क नहीं लेगा। तयशुदा अवधि में प्रशिक्षण पूरा करने वाली बालिकाओं को प्रमाण-पत्र भी दिए जाएंगे।
सरकार को भेजा प्रस्ताव
कॉलेज ने नि:शुल्क कम्प्यूटर कोर्स चलाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। कॉलेज के पास कम्प्यूटर लैब और अन्य संसाधन हैं, लेकिन बजट के लिए वह राज्य सरकार पर निर्भर है। कॉलेज ने प्रस्ताव में दिव्यांग अथवा पिछड़ी जातियों से जुड़ी सरकारी योजनान्तर्गत बजट मुहैया कराने का सुझाव भी दिया है, ताकि बालिकाओं को पाठ्यक्रम कराने में कोई दिक्कत नहीं हो।
यह होगा फायदा
-दिव्यांग और गरीब बालिकाओं को मिलेगा रोजगार
-तकनीकी रूप से हो सकेंगी दक्ष
-स्टार्ट अप अथवा खुद का रोजगार शुरू करने में होगी सहूलियत
-कॉलेज की बढ़ेगी सामाजिक जिम्मेदारी
-कौशल विकास योजना का मिलेगा बढ़ावा
दिव्यांग और कमजोर तबके की बालिकाओं के लिए शॉर्ट टर्म कम्प्यूटर कोर्स शुरू करने की योजना है। सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही ऐसे कोर्स शुरू किए जाएंगे।
डॉ. अजय सिंह जेठू, प्राचार्य, राजकीय महिला इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर
Published on:
14 May 2016 06:43 am
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