
जयपुर। राजधानी के औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना अब दूभर हो गया है। सरकार की ओर से कागजों में दौड़ाया जा रहा 5 किलो के 'छोटू सिलेंडर' का फॉर्मूला धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है। आलम यह है कि गैस एजेंसियों पर छोटे सिलेंडर मिल नहीं रहे और खुले बाजार में मजदूरों को 250 से 300 रुपए प्रति किलो के हिसाब से ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ रही है। इस लूट और किल्लत से तंग आकर अब विश्वकर्मा जैसे औद्योगिक इलाकों से मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है।
सीकर रोड स्थित विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया के रोड नंबर 17 में जब श्रमिक पैरवी व अधिकार केंद्र एवं PUCL की टीम ने ग्राउंड सर्वे किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पीयूसीएल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने मौके पर देखा कि मजदूरों के लिए सरकारी रेट पर 5 किलो का सिलेंडर उपलब्ध ही नहीं है। 7-8 हजार महीना कमाने वाला मजदूर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ ईधन पर खर्च कर रहा है, जिससे उनके घर का बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 5 किलो के छोटे सिलेंडर की रिफिलिंग की कीमत लगभग 616 रुपए है। इस हिसाब से 1 किलोग्राम गैस की कीमत करीब 123 रुपए बैठती है। लेकिन हकीकत में एजेंसियां और बिचौलिए मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
रिपोर्ट में सामने आया कि जब मजदूरों के पास ब्लैक में गैस खरीदने के पैसे नहीं होते तो वे लकड़ियां बीनकर चूल्हा जलाने की कोशिश करते हैं। लेकिन शहर के कमरों में रहने वाले इन मजदूरों को मकान मालिक धुएं के डर से चूल्हा नहीं जलाने देते। विश्वकर्मा इलाके में अन्नपूर्णा रसोई की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण कई बार मजदूरों को भूखे पेट ही सोना पड़ता है। यही वजह है कि अब यूपी और बिहार के श्रमिक जयपुर छोड़कर अपने गांव लौटने लगे हैं।
पीयूसीएल संस्था की रिपोर्ट बताती है कि अकेले विश्वकर्मा क्षेत्र में 40 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर रहते हैं। इनमें से अधिकांश की स्थिति दयनीय है। कविता श्रीवास्तव ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर जिला कलेक्टर संदेश नायक, डीएसओ प्रियव्रत सिंह चारण और मुख्य सचिव वी श्रीनिवास से मुलाकात की। उन्होंने चेताया कि अगर तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया गया तो उद्योगों को चलाने वाला यह मजदूर वर्ग पूरी तरह पलायन कर जाएगा।
मजदूरों की पीड़ा सामने आने के बाद रसद विभाग हरकत में आया है। डीएसओ प्रियव्रत सिंह ने बताया कि पूरे मामले की सघन जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब गैस एजेंसियों के भरोसे बैठने के बजाय पेट्रोल पंपों पर छोटे सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। इससे मजदूरों को अपनी शिफ्ट खत्म करने के बाद आसानी से और सही दाम पर गैस मिल सकेगी।
जिला कलेक्टर संदेश नायक ने कहा कि मजदूरों का पलायन रोकना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने रसद अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ब्लैक में बेचने वालों पर नकेल कसी जाए और सप्लाई चेन को दुरुस्त किया जाए। प्रशासन अब पेट्रोल पंप के जरिए सीधे श्रमिक बस्तियों तक सस्ते सिलेंडर पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि मजदूरों को बिचौलियों के चंगुल से छुड़ाया जा सके।
Updated on:
21 Apr 2026 11:39 am
Published on:
21 Apr 2026 11:34 am
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