
नूपुर शर्मा
जयपुर। हर वर्ष 4 अक्टूबर को पूरे विश्व में World Animal Day मनाया जाता है। जानवरों को सम्मान देने, जानवरों के प्रति लोगों के दिलों में क्रूरता और हीन भावना को मिटाने के लिए यह दिन शुरू किया गया। मनुष्य के जीवन में जानवरों का बहुत महत्व है। इनके बिना मानव का अस्तित्व नहीं है, क्योंकि अगर धरती से सभी जानवर खत्म हो गए तो इंसानों का जिंदा रहना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे कई जानवर हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में मनुष्य के रोजमर्रा के कार्यों में मदद करते हैं। कई अन्य कार्य है जो हम सब जानवरों के बिना नहीं कर सकते।
वर्ल्ड एनिमल डे का मूल उद्देश्य विलुप्त जानवरों की रक्षा करने के साथ-साथ मनुष्यों और जानवरों के संबंधों को मजबूत करना है। वर्ल्ड एनिमल डे को असीसी के सेंट फ्रांसिस के सम्मान में रूप में मनाया जाता है, जो जानवरों के लिए बहुत बड़े पशु प्रेमी और संरक्षक संत बने। जानवरों के प्रति लोगों की क्रूरता को समाप्त करने के लिए इस दिन की शुरुआत की गई है। जैसा कि हम सभी मनुष्यों को जीने का अधिकार दिया गया है। उसी तरह जानवरों को भी जीवन का अधिकार दिया गया है।
इस वर्ष के विश्व पशु दिवस का विषय "साझा ग्रह" है जो यह मानता है कि दुनिया हर तरह के जानवरों का अधिकार है, इंसानों और जानवरों के समान अधिकार हैं।
जानवर हमारे इको सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से इको सिस्टम में संतुलन बना रहता है। पशु अधिकार संगठनों, व्यक्तियों और सामुदायिक समूहों द्वारा इस दिन दुनियाभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इंसानों द्वारा बदलते समय में कई जानवरों की प्रजातियों का उनके जीवन पर हानिकारक प्रभाव पड़ा है। मनुष्यों की अपेक्षा से अधिक लाभ के कारण, कई जानवर अपना अस्तित्व खो चुके हैं या विलुप्त होने के कगार पर हैं।
पहला वर्ल्ड एनिमल डे 1925 में हेनरिक ज़िमर्मन द्वारा जर्मनी के बर्लिन में स्पोर्ट्स पैलेस में आयोजित किया गया था। लेकिन साल 1929 से यह दिन 4 अक्टूबर को मनाया जाने लगा। 1931 में फ्लोरेंस में आयोजित जानवरों के संरक्षण पर अयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 4 अक्टूबर को विश्व पशु दिवस के रूप में मनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया।
भारत के संविधान ने जानवरों को भी जीवन जीने की आजादी दी है। यदि उनके जीवन को बाधित करने का कोई प्रयास किया जाता है, तो इसके लिए संविधान में कई प्रकार की सजा का प्रावधान है। जानवरों पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1972 में भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम पारित किया। इसका उद्देश्य जंगली जानवरों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार को रोकना था। इसमें संशोधन किया गया जिसे भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 2002 का नाम दिया गया। इसमें दंड और जुर्माने को शामिल किया गया।
Updated on:
04 Oct 2022 11:16 am
Published on:
04 Oct 2022 11:14 am
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