
जयपुर। वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली और खान-पान के कारण किडनी (गुर्दे) से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर साल बड़ी संख्या में लोग किडनी फेल्योर और डायलिसिस जैसी गंभीर समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और आधुनिक तकनीक के जरिए इस गंभीर बीमारी पर विजय पाई जा सकती है। शैल्बी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. कविश शर्मा ने बताया कि क्रॉनिक किडनी डिजीज, डायलिसिस और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं के कारण गुर्दे खराब होने के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के जरिए किडनी की बीमारियों को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है।
वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय बिनवाल ने बताया कि अब तक कुल 10 किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। जिनके किडनी ट्रांसप्लाट किए गए है। उनकी उम्र 30 से 40 वर्ष के बीच है। ऑपरेशन के बाद रोगी पूरी तरह स्वस्थ है और तेजी से रिकवरी कर रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, प्रत्यारोपण के मामलों में डोनर का सटीक मूल्यांकन और सर्जरी के बाद की देखभाल सबसे महत्वपूर्ण होती है।
प्रत्यारोपण प्रक्रिया के बारे में बताते हुए डॉ. सुभाष कटारिया ने कहा कि गुर्दा रोगों से जुड़ी जांच, ऑपरेशन और सर्जरी के बाद की 'पोस्ट-ऑपरेटिव केयर' के लिए अब एकीकृत व्यवस्थाएं विकसित हो चुकी हैं। नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग के आपसी तालमेल से मरीजों को एक ही स्थान पर सम्पूर्ण उपचार मिल रहा है। इससे मरीजों को अलग-अलग केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और संक्रमण का खतरा भी न्यूनतम रहता है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान अब चिकित्सा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। जयपुर में उपलब्ध आधुनिक संसाधनों के कारण अब प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को किडनी से जुड़ी जटिल सेवाओं के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े महानगरों की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है।
Published on:
12 Mar 2026 10:27 pm
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