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एक सिगरेट व्यक्ति की जिंदगी के अमूल्य 11 मिनट कम कर देती है कम

एक सिगरेट व्यक्ति के जीवन के अमूल्य 11 मिनट कम कर देती है। अभी भी तम्बाकू दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।
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World No Tobacco Day

जयपुर। एक सिगरेट व्यक्ति के जीवन के अमूल्य 11 मिनट कम कर देती है। अभी भी तम्बाकू दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। यह जानकारी सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेश अग्रवाल ने दी।

तम्बाकू सेवन छोडऩे का संकल्प दिलाया
वे World No Tobacco Day के अवसर पर आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि चीन में 27 प्रतिशत लोग तम्बाकू सेवन करते हैं। भारत इस लिहाज से दुनिया में दूसरे नम्बर पर है, जहां लगभग 10 प्रतिशत आबादी किसी न किसी तरह से तम्बाकू सेवन करती है। कार्यक्रम के प्रतिभागियों को तम्बाकू सेवन छोडऩे का संकल्प दिलाया गया।

धूम्रपान सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक
तंबाकू बीमारियों की जड़ है। देश में हर रोज सैकड़ों लोग तंबाकू जनित बीमारियों से अपनी जिंदगी गंवा देते हैं। धूम्रपान दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक है। भारत में तम्बाकू का इस्तेमाल निवारक रोगों और मृत्यु का प्रमुख कारण है। धूम्रपान करने वालों पर 7,000 से अधिक रसायनों का असर होता है, जिनमें करीब 250 रसायन प्रामाणिक तौर हानिकारक और और करीब 69 रसायन कैंसरकारी होते हैं।

क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डीजीज (COPD), हृदयधमनी रोग (CVD) और फेफड़े के कैंसर के लिए धूम्रपान प्रमुख जोखिम घटक है। सीओपीडी की स्वाभाविक प्रगति में बदलाव का एकमात्र प्रमाणिक तरीका है धूम्रपान बंद करना। यह मायोकार्डियल इन्फाक्र्शन और फेफड़े का कैंसर का खतरा कम करने का भी सबसे असरदार तरीका है। धूम्रपान करने वाले लोग फेफड़े के कैंसर के शुरुआती चरण का पता चलने पर धूम्रपान छोड़ देते हैं, जिससे मृत्यु और फेफड़े के कैंसर की पुनरावृत्ति का खतरा काफी कम हो जाता है।

तम्बाकू का सेवन करने वालों में धूम्रपान करने वालों का अनुपात 35.1 फीसदी है। तम्बाकू का धूम्रपान करने वालों पर 7,000 से अधिक रसायनों का असर होता है, जिनमें करीब 250 रसायन प्रामाणिक तौर हानिकारक और और करीब 69 रसायन कैंसरकारी होते हैं। भारत में कैंसर के सभी मामलों में 30 फीसदी से ज्यादा मुंह और फेफड़ों के कैंसर के मामले हैं। भारत में मुंह के कैंसर के लगभग एक-चैथाई मामलों के पीछे तम्बाकू के इस्तेमाल का हाथ है। तम्बाकू के धुएं में 40 से अधिक रसायनों को कैंसरकारी पाया गया है। धूम्रपान से आपके फेफड़े और श्वसन तंत्र के अन्य हिस्से भी क्षतिग्रस्त होते हैं, आपका रक्तचाप बढ़ जाता है और आपके शरीर में आक्सीजन की कमी हो जाती है। यह तम्बाकू के महज कुछ हानिकारक प्रभाव हैं।