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विश्व शरणार्थी दिवस: पाकिस्तान से राजस्थान आए शरणार्थियों की मुश्किलें नहीं हुई कम

दुनिया भर में 20 जून को शरणार्थी दिवस मनाया जाता है।

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विश्व शरणार्थी दिवस: पाकिस्तान से राजस्थान आए शरणार्थियों की मुश्किलें नहीं हुई कम

विश्व शरणार्थी दिवस: पाकिस्तान से राजस्थान आए शरणार्थियों की मुश्किलें नहीं हुई कम

जयपुर। दुनिया भर में 20 जून को शरणार्थी दिवस मनाया जाता है। राजस्थान की बात करें तो यहां हजारों की संख्या में पाक विस्थापित है। जिनमें से कईयों को राजस्थान सरकार की ओर से भारतीय नागरिकता दी गई है। वहीं करीब 25 हजार ऐसे भी पाकिस्तान से भागकर आए हिंदू विस्थापित है। जो आज भी भारतीय नागरिकता का इंतजार कर रहें है। भले ही नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 संसद से पास हो गया है, लेकिन उसका लाभ हिंदू शरणार्थियों को नहीं मिल रहा है। लेकिन भारतीय नागरिकता न मिलने के कारण उन्हें अब भी न सिर्फ सरकारी योजनाओं से वंचित रहना पड़ता है बल्कि निजी क्षेत्र के दरवाजे भी उनके लिए बंद रहते हैं।

जयपुर जिले में साल 2017 से अब तक 274 पाक नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है। साल 2022 में विश्व शरणार्थी दिवस से लेकर अब तक जयपुर जिले में भारतीय नागरिकता लेने के लिए 61 आवेदन जिला प्रशासन को मिले है। वही इस साल में जयपुर जिला प्रशासन की ओर से 56 पाकिस्तानी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी गई है।

नागरिकता देने के लिए कलेक्टर को अधिकार

केंद्र सरकार ने नागरिकता देने को लेकर तीन साल पहले दिशा-निर्देश जारी कर जिला कलेक्टर्स को अधिकार दिए थे। मगर यहां भी औपचारिकताएं इतनी हैं कि इन विस्थापितों को नागरिकता मिलने का काम धीरे चल रहा है। अब केंद्र सरकार प्राकृतिक रहवास की अवधि 12 से 6 साल करने जा रही है, ऐसे में कुछ लोगों को सीधे इसका फायदा मिल जायेगा। ये ऐसे लोग हैं जिनके माता-पिता का जन्म 1947 के बाद हुआ और नागरिकता के लिए जरुरी रहवास करने की अवधि को पूरा कर चुके हैं।

ऐसे मिलती है नागरिकता

पाक विस्थापितों को नागरिकता देने के लिए एसीपी की तरफ से जांच होने के बाद कलेक्टर को रिपोर्ट भेजी जाती है। संबंधित जिला कलेक्टर केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय क्लीयरेंस के लिए आवेदन जांच एजेंसी आईबी के पास भेजता है। आईबी क्लीयरेंस के बाद संबंधित जिला कलेक्टर नागरिकता प्रदान करते हैं। इसके लिए नागरिकता कैंप लगाए जाते हैं। भारत सरकार ने राज्य के जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, सिरोही, बीकानेर, जालौर और पाली कलेक्टर को नागरिकता देने के लिए शक्तियां दे रखी हैं। अन्य जिलों में राज्य सरकार का गृह विभाग नागरिकता प्रमाण पत्र देता है। इन जिलों को राज्य के गृह विभाग से अनुमति नहीं लेनी होती है। हालांकि, गृह विभाग को सूचना देनी होती है।

इस कारण होता है विलम्ब

भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के समय पाकिस्तानी पासपोर्ट चालू हालात में होना चाहिये। यानि एक्सपायर्ड डेट का पासपोर्ट मान्य नहीं होता। सात साल यहां निकालने के दौरान अधिकांश विस्थापितों का पासपोर्ट एक्सपायर्ड हो जाता है। ऐसे में उन लोगों को पाकिस्तानी दूतावास से इसका नवीनीकरण करवाना पड़ता है। पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए पाक दूतावास के चक्कर काटने में समय के साथ काफी पैसा खर्च हो जाता है। आमतौर पाकिस्तानी विस्थापित पर्यटन या धार्मिक वीजा पर भारत आते हैं और फिर यहीं बस जाते है। यहां रहने के लिए उन्हें अपने रहने के स्थान के साथ ही एक गारंटर का नाम व पता देना होता है। बरसों तक नागरिकता का इंतजार करने के दौरान ये लोग काम के सिलसिले में पुराना पता छोड़ और कहीं रहना शुरू कर देते है। ऐसे में नागरिकता प्रदान करने से पहले आईबी की टीम पुराने पते पर पहुंचती है तो सम्बन्धित व्यक्ति वहां नहीं मिलता। इस पर उसके खिलाफ रिपोर्ट चली जाती है और नागरिकता अटक जाती है।

नियमों का हो सरलीकरण

पाक विस्थापितों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग बरसों से नागरिकता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उनके अनुसार पासपोर्ट नवीनीकरण की शर्त को बदला जाना चाहिये। यहां आते ही एक बार पासपोर्ट सरेंडर करवा दिया जाए, ताकि पाकिस्तानी दूतावास के चक्कर नहीं काटना पड़े। साथ ही गारंटर की वर्तमान व्यवस्था में कुछ बदलाव होना चाहिये।

क्‍यों मनाया जाता है शरणाार्थी दिवस

विश्व शरणार्थी दिवस 2023 20 जून को विश्‍व भर में शरणार्थी दिवस का ये स्‍पेशल दिन शरणार्थियों और विस्थापितों के सामने आने वाली चुनौतियों की वैश्विक याद दिलाता है। विश्व शरणार्थी दिवस के अवसर पर शरणार्थियों के लिए जागरूकता, एकजुटता और समर्थन को बढ़ावा दिए जाने के लिए प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, फिल्मों का प्रदर्शन समेत अन्‍य कार्यक्रम किए जाते हैं। इसका उद्देश्य शरणार्थियों और विस्थापितों के सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करने के लिए उनके प्रति लचीलापन और समाज में योगदान का सम्मान करते हुए समझ और लोगों में इनके प्रति करुणा का भाव उत्‍पन्‍न करना है।

इनका कहना है ...

पाक विस्थापित लोगों को दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके बाद उन्हें भारतीय नागरिकता मिलती है। जयपुर में जो आवेदन लंबित है। उन्हें जल्द निस्तारण करने का प्रयास किया जाएगा।

मोहम्मद अबूब्रक, एडीएम दक्षिण