
नूपुर शर्मा/ जयपुर
हम रोज आत्महत्या की खबरें पढ़ते और सुनते हैं। सुसाइड करने के कई कारण होते हैं। वर्तमान समय में सुसाइड एक बहुत बड़ा चिंता का विषय बनता जा रहा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल करीब 8 लाख लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं। इनमें से ज्यादातर सुसाइड के मामले 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग के हैं।
दुनिया भर में बढ़ती आत्महत्याओं को रोकने के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से हर साल 10 सितंबर को दुनियाभर में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। सुसाइड के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह जानना जरूरी हो जाता है कि इससे व्यक्ति के मन में सुसाइड करने के विचार किस प्रकार आते हैं। तनाव से गुजर रहे लोगों को अपने चाहने वालों या बात करने वालों की जरूरत होती है ताकि वे अपने दिलों को हल्का कर सकें।
सुसाइड के ज्यादातर मामले अविकसित और विकासशील देशों में देखे जाते हैं। जबकि सुसाइड और मानसिक डिसॉर्डर्स (विशेष रूप से, अवसाद और शराब के उपयोग के विकार) के बीच की कड़ी अच्छी तरह से स्थापित की जाती है। कई आत्महत्याएं संकट के क्षणों में इम्पुल्सेस में होती हैं।
समाज के बनाए नियम भी एक कारण
जानकारों के मुताबिक व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने का ख्याल तब आता है, जब वह किसी मुश्किल से बाहर नहीं निकल पाता और कोई रास्ता नहीं निकलता। ऐसे में वह सुसाइड की राह आसान समझता है। कई बार देखने में आया है कि समाज की ओर से बनाए गए नियम भी आत्महत्या का एक कारण बन जाते हैं।
विशेषज्ञों ने दिए बचाव के सुझाव
विशेषज्ञों के अनुसार जितना हो सके डिप्रेशन वाले व्यक्ति से बात करें। वह आपसे अपनी चिंता, घबराहट, परेशानी, तनाव और उलझनों को शेयर करेगा। उनके दिमाग में क्या चल रहा या वो क्या सोच रहा है, आप उनसे इस बारे में बात करेंगे तो वह काफी हद तक हल्का महसूस करेगा। और विचारों में भी बदलाव होगा।
आत्महत्या करने के प्रमुख कारण
— अकेलापन महसूस करना
— भेदभाव, ब्रेक-अप
— फाइनेंसियल समस्याएं
— पुरानी पीड़ा और बीमारी
— हिंसा, दुर्व्यवहार और संघर्ष
Published on:
10 Sept 2022 03:36 pm
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