
Yamuna Water Agreement Rajasthan Politics - File PICS
राजस्थान और हरियाणा के बीच लंबे समय से लंबित चल रहे यमुना जल समझौते को लेकर मरुधरा की सियासत में एक बार फिर भारी उबाल आ गया है, जहां राज्य सरकार द्वारा हरियाणा के साथ किए गए नए मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) के प्रावधानों को सार्वजनिक न किए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन कांग्रेस नेताओं ने वर्तमान भाजपा सरकार पर प्रदेश के जल अधिकारों को गिरवी रखने और हितों का समर्पण करने के आरोप लगाए हैं, जिसके तुरंत बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मध्यस्थता और 1994 के मूल समझौते की निरंतरता का हवाला देते हुए तीखा पलटवार किया है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे मामले को लेकर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। गहलोत ने कहा कि यमुना जल समझौते को लेकर वर्तमान राज्य सरकार ने हरियाणा के साथ जो नया MoA साइन किया है, उसे आश्चर्यजनक रूप से अभी तक गुप्त रखा गया है। राजस्थान की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में किन शर्तों पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी है।
गहलोत ने लगभग 2.5 वर्ष पूर्व 17 फरवरी 2024 को किए गए पुराने MoU का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि उसे भी लोकसभा चुनावों तक जनता से छिपाकर रखा गया था। बाद में सामने आया कि उस समझौते में पहले हरियाणा को 24,000 क्यूसेक पानी देने और शेष बचे पानी को ही राजस्थान को आवंटित करने की बेहद प्रतिकूल शर्त शामिल थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि नए MoA में भी इसी तरह की शर्तों को दोहराया गया है, तो यह वर्ष 1994 के मूल समझौते की मूल भावना के पूरी तरह विपरीत है। 1994 के एग्रीमेंट में स्पष्ट प्रावधान था कि यमुना जल का वितरण सभी भागीदार राज्यों को 'Pro Rata Basis' (यानी पानी की कुल उपलब्धता के अनुपात) में किया जाएगा, जिसमें किसी एक राज्य को कोई एकतरफा प्राथमिकता या विशेष अधिकार नहीं दिया गया था।
उन्होंने मांग की है कि इस नए MoA की प्रति तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक की जाए क्योंकि जल अधिकारों से कोई समझौता स्वीकार नहीं हो सकता।
यमुना जल समझौते के तकनीकी पक्षों को लेकर राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने वर्तमान भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। डोटासरा ने कहा कि राजस्थान अपने हक और हिस्से का पानी मांग रहा है, वह किसी की दया का पात्र नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस नए MoA के जरिए राजस्थान के हितों की पूरी तरह से हत्या कर दी गई है और सरकार द्वारा इसे हरियाणा की कृपा के रूप में पेश करना पूरे प्रदेश के लिए शर्मनाक है।
डोटासरा ने मुख्यमंत्री के समक्ष गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूछा:
सीमित समय अवधि: नए MoA के तहत राजस्थान को सिर्फ जुलाई से अक्टूबर (यानी बारिश के दिनों में) केवल 4 महीने ही पानी क्यों मिलेगा? नवंबर से जून की शेष 8 महीनों की अवधि में राजस्थान को कोई जल आवंटन क्यों नहीं होगा?
जल की मात्रा में कटौती: 1994 के मूल समझौते में राजस्थान को 1.19 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी मिलना तय था, तो फिर इस नए MoA में केवल 580 MCM पानी मिलने का ही जिक्र क्यों है?
अतिरिक्त पानी की शर्त: यमुना नहर की पूरी क्षमता के उपयोग के बाद, केवल बारिश के समय अतिरिक्त पानी बचने पर ही राजस्थान को पानी मिलने की शर्त क्यों जोड़ी गई, जबकि 1994 के मूल दस्तावेज में ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी?
हरियाणा के गांवों को प्राथमिकता: राजस्थान जाने वाली पाइपलाइन से हरियाणा के भिवानी, फतेहाबाद और अन्य गांवों को पहले पानी लेने का अधिकार क्यों दिया गया?
हरियाणा की मनमर्जी: हरियाणा द्वारा पहले 13,000 क्यूसेक, फिर 18,000 क्यूसेक और बाद में 24,000 क्यूसेक पानी को लेकर की जा रही मनमर्जी के आगे वर्तमान सरकार ने समर्पण क्यों किया?
सिंचाई पर भ्रम: यदि नए एग्रीमेंट के हिसाब से राजस्थान को केवल पेयजल (Drinking Water) का ही पानी मिलना तय हुआ है, तो फिर शेखावाटी क्षेत्र की 1.05 लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई का झूठा भ्रम क्यों फैलाया जा रहा है?
डोटासरा ने अंत में कहा कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) के नियंत्रण के बावजूद हरियाणा ने अपनी मर्जी से एकतरफा पानी कैसे तय कर लिया? उन्होंने मांग की है कि सरकार जल आवंटन, वित्तीय जिम्मेदारी, लागत-बंटवारे और पानी छोड़ने के नियमों की पूरी प्रति जनता के सामने रखे ताकि साफ हो सके कि यह परिणाम "अधिकार है या समर्पण"।
कांग्रेस के इन गंभीर आरोपों के बाद राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कमान संभालते हुए विपक्ष पर करारा राजनीतिक पलटवार किया है। राठौड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह एक ऐतिहासिक सच है कि यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को हरियाणा से अपने हिस्से का पानी मिलना तय था, जिसके लिए प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों के समय जरूरी राशि भी जमा कराई जा चुकी थी। लेकिन राज्यों में सरकारों के बदलने और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह पूरी स्थिति उलझकर रह गई थी।
मदन राठौड़ ने वर्तमान सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस दिशा में बेहद ठोस और गंभीर प्रयास किए हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक प्रभाव का सही इस्तेमाल किया और इस मामले में केंद्र सरकार का पूरा समर्थन हासिल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विधिक निर्देशों पर अमल करते हुए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कुशल मध्यस्थता के चलते ही दोनों राज्यों के बीच इस बहुप्रतीक्षित डील को अंतिम रूप दिया जा सका है। अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की गरिमामयी उपस्थिति में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए हैं। अब राजस्थान को उसके हक का पानी मिलना शुरू हो जाएगा।
राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर चुटकी लेते हुए कहा कि गहलोत साहब को अब अपनी राजनीति छोड़कर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का माला पहनाकर और उन्हें सम्मानित करके अपना पुराना वादा पूरा करना चाहिए।
Published on:
30 Jun 2026 08:48 am
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