
टोंक रोड. ना तो इस रेड लाइटों पर वाहन रूक रहे और ना ही यहां जेब्रा क्रॉसिंग बनी हुई। हादसों का होना और लोगों का घायल होना यहां रोज का नियम हो गया है। हम बात कर रहे हैं त्रिवेणी नगर चौराहे की, जहां जेब्रा क्रॉसिंग नहीं होने से आए दिन पैदल राहगीरों को हादसे का शिकार होना पड़ रहा है। कई बार तो नौबत यहां तब आ पहुंचती है कि राहगीरों को ५-५ मिनट तक वाहनों के निकलने का इंतजार करता है। टोंक रोड को मानसरोवर और सोडाला जैसे बड़े इलाकों से जोडऩे वाला ये चौराहा आए दिन हादसों का पॉइंट बनते जा रहा है।
यातायातकर्मी भी रहते नदारद-
त्रिवेणी नगर चौराहे पर यातायात कर्मी ही कभी कभार ही नजर आते हैं। ऐसे में यहां लोगों को यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते आसानी से देखा जा सकता है। रेड लाइट पर भी वाहनचालक अपनी निर्धारित गति से तेज चलाते हुए वाहनों को ले जाते हैं।
इमली फाटक भी अछूता नहीं-
टोंक रोड इलाके में जेब्रा क्रॉसिंग नहीं बना होना सिर्फ यहां तक ही सीमित नहीं है, सहकार मार्ग स्थित इमली फाटक पर भी रेड लाइट पर जेब्रा क्रॉसिंग नहीं बनी हुई। इससे यहां भी आए दिन हादसे होते रहते हैं। ये स्थिति विधानसभा की ओर जाने वाले रास्ते की है।
आए दिन होते हैं हादसे-
त्रिवेणी नगर और इमली फाटक जैसे बड़े इलाकों में यातायात का भारी दबाव रहता है। ऐसे में जेब्रा क्रॉसिंग नहीं होने से आए दिन हादसे भी होते रहते हैं। इलाके के स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार उन्होंने इसकी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इलाके में यातायात का दबाव काफी रहता है। जेब्रा क्रॉसिंग नहीं होने से कई बार मुझे भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गाडिय़ां रेड लाइट होने पर भी दौड़ती रहती है।
-अंकित
कॉचिंग के चलते मेरा रोजाना यहां से गुजरना होता है। ऐसे में जेब्रा क्रॉसिंग नहीं होने से कई बार हादसे की आशंका बनी रहती है। यातायात दबाव के चलते पैदल रोड क्रॉस करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
-पवन जैन

Published on:
16 Feb 2018 01:18 pm
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