
रोशनी सीमित, रफ्तार तेज और पशुओं की आवाजाही... यही है रात में जैसलमेर-पोकरण हाइवे की हकीकत।
जैसलमेर. दिन में पश्चिमी राजस्थान की सबसे तेज और भरोसेमंद सड़कों में गिना जाने वाला जैसलमेर-पोकरण राष्ट्रीय राजमार्ग रात ढलते ही जोखिम की पट्टी में बदल जाता है। करीब 110 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर लगभग 100 किलोमीटर दूरी ऐसी है, जहां वाहन चालक केवल हेडलाइट की रोशनी के भरोसे सफर तय करते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक सड़क पर आ जाते ऊंट, नीलगाय और खुले मवेशी कई बार कुछ ही सेकंड में सामान्य सफर को दुर्घटना में बदल देते हैं। गौरतलब है कि उक्त मार्ग केवल दो शहरों को नहीं जोड़ता, बल्कि जैसलमेर पर्यटन, पश्चिमी सीमा क्षेत्र और सैन्य गतिविधियों का सबसे महत्वपूर्ण सड़क संपर्क है। इसके बावजूद रात की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ते ट्रैफिक की रफ्तार के साथ कदम नहीं मिला सकी है। यह वही मार्ग है, जिससे हर साल लाखों पर्यटक जैसलमेर पहुंचते हैं। यही मार्ग सेना की रणनीतिक आवाजाही का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में सुरक्षित नाइट कॉरिडोर केवल यातायात नहीं, बल्कि पर्यटन, अर्थव्यवस्था और सामरिक दृष्टि से भी आवश्यक बन चुका है।
बीते वर्षों में जैसलमेर आने वाले पर्यटक वाहनों, निजी कारों, ट्रकों और सैन्य वाहनों की संख्या लगातार बढ़ी है। इसके विपरीत हाईवे पर रोशनी, आधुनिक चेतावनी तंत्र, फेंसिंग और वन्यजीव सुरक्षा जैसे इंतजाम लगभग वहीं के वहीं हैं। यही अंतर इस मार्ग को रात में अधिक संवेदनशील बनाता है।
चाचा, खेतोलाई, धोलिया, गंगाराम की ढाणी, लाठी और चांधन के बीच पशुओं की आवाजाही सबसे अधिक रहती है। ऊंटों के झुंड कई बार बिना किसी संकेत के सड़क पार करते हैं। खुले मवेशी रात में डामर सड़क की गर्मी पर बैठ जाते हैं। अंधेरे में उनका रंग सड़क में घुल जाने से चालक को अंतिम क्षण तक उनका आभास नहीं होता।
पूरे मार्ग में डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट केवल सीमित आबादी क्षेत्र तक दिखाई देती हैं। अधिकांश दूरी में न पर्याप्त रोशनी है, न लगातार रिफ्लेक्टिव चेतावनी बोर्ड। कई स्थानों पर पुरानी तारबंदी क्षतिग्रस्त है, जिससे पशु सीधे सड़क तक पहुंच जाते हैं।
- लगभग 100 किलोमीटर हिस्सा सीमित रोशनी में।
-कई हिस्सों में तारबंदी टूटी।
- पशु चेतावनी संकेतक सीमित।
-हाईवे पर रातभर भारी वाहनों की लगातार आवाजाही।
- पर्यटन सीजन में दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
- एआइ आधारित एनिमल डिटेक्शन सेंसर
-हर 500 मीटर पर रिफ्लेक्टिव स्मार्ट साइनेज
-सोलर हाईमास्ट लाइटिंग
-दोनों तरफ मजबूत वायर फेंसिंग
-थर्मल कैमरा आधारित निगरानी
- नियमित नाइट हाईवे पेट्रोलिंग
-110 किलोमीटर लम्बा है जैसलमेर-पोकरण राष्ट्रीय राजमार्ग
- 100 किलोमीटर रात में सीमित रोशनी वाला हिस्सा
-24 घंटे पर्यटन, सेना और मालवाहक ट्रैफिक
- 5 संवेदनशील क्षेत्र चाचा, खेतोलाई, धोलिया, लाठी, चांधन
हाईवे पर हादसे केवल चालक की गलती से नहीं होते। जहां पशु आवाजाही स्थायी है, वहां फेंसिंग, बड़े रिफ्लेक्टिव संकेतक, सोलर लाइटिंग और नियमित निगरानी को सड़क निर्माण का अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा। सुरक्षा व्यवस्था ट्रैफिक की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित होगी, तभी रात का सफर सुरक्षित बन सकेगा।
-अरविंद गोपा, अधिवक्ता
Updated on:
04 Aug 2026 08:32 pm
Published on:
04 Aug 2026 08:32 pm
