
जैसलमेर जिला पूर्व सैनिक संस्थान के तत्वावधान में 1971 के भारत–पाक युद्ध की ऐतिहासिक विजय की स्मृति में सोमवार को जवाहिर छात्रावास प्रांगण में विजय दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत अमर शहीदों के चित्रों पर दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि से हुई। इसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया और शौर्य व बलिदान को स्मरण किया गया। समारोह में युद्ध विजेताओं, पदक विजेताओं, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया।समारोह के मुख्य अतिथि पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने कहा कि देशवासी वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान को सदैव स्मरण रखेंगे। उन्होंने कहा कि संत और सैनिक समाज के दो मजबूत स्तंभ हैं—एक धर्म की रक्षा करता है, दूसरा देश की। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए सतत प्रयास और उनके वारिसों से जुड़े लाइसेंस व नहरी भूमि आवंटन जैसे मुद्दों को विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। समारोह की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट कर्नल वीके सिंह ने की। उन्होंने विजय दिवस पर उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों का आभार व्यक्त किया और वीर शहीदों को नमन किया। विशिष्ट अतिथि सगतसिंह ओईता ने कहा कि 16 दिसंबर भारत के लिए गौरव का दिन है। वर्ष 1971 के युद्ध में बांग्लादेश की आज़ादी और पाकिस्तान पर निर्णायक विजय ने भारतीय सेना की क्षमता सिद्ध की। उन्होंने 1962, 1965 और कारगिल युद्धों में सेना की वीरता का भी उल्लेख किया।
पूर्व यूआइटी चेयरमैन उम्मेदसिंह तंवर ने कहा कि 1971 के युद्ध में बड़ी संख्या में पाक सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया, जो भारतीय सेना की रणनीति और साहस का प्रमाण है। रिटायर्ड कर्नल एआर पंवार ने कहा कि तेरह दिनों में मिली विजय सैनिकों के कठिन परिश्रम और त्याग का परिणाम रही। रिटायर्ड कर्नल भीमसिंह ने कहा कि पूर्व सैनिक आज भी राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और देशविरोधी गतिविधियों पर सतर्क रहना उनकी जिम्मेदारी है। निवर्तमान जिला प्रमुख प्रतापसिंह सोलंकी ने आयोजन की सराहना की और मातृशक्ति को नमन किया। जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी ने कहा कि पूर्व सैनिकों का शौर्य सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
उन्होंने क्षेत्र में बालिका सैनिक स्कूल के शुभारंभ और जीरा मंडी स्थापना का उल्लेख किया। कार्यक्रम में लालाराम चौधरी ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावुक बना दिया। आयोजन में सहयोग करने वाले भामाशाहों और व्यवस्थापकों का सम्मान किया गया। 1971 युद्ध के साक्षी रहे सगतसिंह भाटी, छोटूसिंह बीदा और रणसिंह भाटी का भी अभिनंदन किया गया। संचालन शिक्षाविद् दलपतसिंह भाटी ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में गौरव सैनिक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
Published on:
16 Dec 2025 08:54 pm
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