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जैसलमेर में एक दिन ठहर जाए सैलानी तो बढ़ जाएगा इतने करोड़ का कारोबार,जानकार आप भी रह जाएंगे हैरान

घूमने का शौक, ठहरने से परहेज... बस एक दिन ठहर जाए सैलानी तो बढ़ जाएगा 300 करोड़ का कारोबार -जैसलमेर में पर्यटन व्यवसाय में सालाना हो रहा 1200 करोड़ का टर्न ओवर- हर 100 में से केवल 20 सैलानी ही करते है दो रात से अधिक ठहराव

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जैसलमेर में एक दिन ठहर जाए सैलानी तो बढ़ जाएगा इतने करोड़ का कारोबार,जानकार आप भी रह जाएंगे हैरान

जैसलमेर. विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान बना चुकी स्वर्णनगरी में यदि एक दिन और सैलानियों का ठहराव होने की स्थिति में 300 करोड़ का टर्न ओवर बढ़ सकेगा। पर्यटन विशेषज्ञों की मानें तो वर्तमान में जैसलमेर आने वाले हर 10 पर्यटकों में से महज 2 पर्यटक ही स्वर्णनगरी में अधिकतम दो रात्रि का ठहराव करते हैं। कलात्मक सुंदरता व लोक संस्कृति के चुंबकीय आकर्षण के कारण सात समंदर पार से भी पर्यटकों को खींच लाने वाली स्वर्णनगरी में यह विषय पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए चिंता का विषय तो बना हुआ है, वहीं सैलानियों की ब पर आवक के बीच उनका ठहराव बढ़ाना भी चुनौती से कम नहीं माना जा रहा। हकीकत यह है कि 10 में से हर 2 सैलानी जैसलमेर में रात्रि ठहराव करते हैं, वहीं 8 पर्यटक ऐसे होते हैं जो कि दो दिन से कम या फिर ठहराव ही नहीं करते। ठहराव कम होने से पर्यटन से जुड़े उद्योगों को उम्मीदों की तुलना में 300 करोड़ का टर्नओवर कम हो रहा है।
हकीकत यह भी
-पर्यटन व्यवसाय के परवान चढ़े तीन दशक होने के बावजूद शासन-प्रशासन सैलानियों का ठहराव बढ़ाने के लिए माकूल व्यवस्थाएं नहीं कर पाया।
-सैलानी सुबह या दोपहर में जैसलमेर पहुंचने पर एक रात नगर के किसी होटल में और दूसरी सम अथवा खुहड़ी स्थित रिसोटर््स में व्यतीत करता है।
-अगले दिन वह उपलब्ध साधन से रवाना हो जाता है।

ऐसा भी होता है..
-पर्यटन नगरी में आने वाले कई पर्यटक तो ऐसे भी होते हैं, जो सुबह जल्दी नगर में पहुंचने पर यहां के दर्शनीय स्थलों का नजारा देखकर कर शाम का सम देखने निकल जाते हैं। वे रिसोटर््स या हट्स में रात बिता कर अगले दिन सुबह ही शहर से विदा हो जाते हैं।

ये है कम ठहराव के कारण-
-सैलानियों को रिझाने वाला जैसलेर में एक भी ढंग का मनोरंजन स्थल विकसित नहीं हो पाया है।
-ग्रामीण हाट का निर्माण कर यहां हर शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन और हस्तशिल्पी को मार्केट मुहैया कराने की योजना थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
-पर्यटन के लिहाज से अन्य शहरों की तरह यहां सुविधाओं से युक्त एक भी पार्क नहीं है, जहां बैठ कर सैलानी सुकून के पल बिता सके। -करीब १५ वर्ष पहले सिटी पार्क बनाने की की कवायद भी अब सरकारी राशि की फिजूलखर्ची ही साबित हुई हैै।
-स्वर्णनगरी में कोई नाट्यशाला अब तक नहीं बन सकी है।
-विश्व वि यात शहर में एक मल्टीप्लेक्स तक की सुविधा नहीं है और न ही अजायबघर बनाने पर किसी का ध्यान गया है।
-सैलानियों को अतीत में हो चुकी घटनाओं से रूबरू करवाने का कोई पु ता इंतजाम नहीं हैैं।

फैक्ट फाइल -
-करीब ८ लाख पर्यटक देश-विदेश से पहुंचते है स्वर्णनगरी
-१२ के करीब पर्यटन स्थल है जैसलमेर क्षेत्र में
-८६२ वर्ष से पुराने बुजुर्ग किले का आज भी कायम है आकर्षण
-८० फीसदी पर्यटक बमुश्किल ठहरते हैं बस एक दिन

इन्होंने कहा
चिंता का विषय तो है...
पर्यटकों का कम ठहराव चिंता का विषय है। सैलानियां का रुझान बढ़ाने के लिए जरूरी है कि माकूल प्रयास किए जाए। ऐसी नीतियां भी बनाने की जरूरत है।
-पुष्पेन्द्र व्यास, पर्यटन व्यवसायी, जैसलमेर

प्रभावी प्रयासों की दरकार
जैसलमेर में संभावनाओं के विपरित पर्यटन के लिहाज से करोड़ों का कारोबार कम हो रहा है। सैलानियों का ठहराव होगा तो पर्यटन को लाभ मिलेगा ही, लेकिन प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
-मेघराजसिंह परिहार, पर्यटन व्यवसायी, जैसलमेर