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हादसे की दस्तक: विद्यालय भवन जर्जर, दरकती दीवारें और मंडरा रहा खतरा

पड़ोसी बाड़मेर जिले की एक सरकारी स्कूल के गेट का पिलर गिरने से उसकी चपेट में आकर चौथी में पढऩे वाली छात्रा को जान गंवानी पड़ी है और उसकी छोटी बहन गंभीर रूप से घायल हुई है।

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पड़ोसी बाड़मेर जिले की एक सरकारी स्कूल के गेट का पिलर गिरने से उसकी चपेट में आकर चौथी में पढऩे वाली छात्रा को जान गंवानी पड़ी है और उसकी छोटी बहन गंभीर रूप से घायल हुई है। इस घटना से एक बार फिर सरकारी स्कूल भवनों की जर्जरावस्था की तरफ सबका ध्यान गया है। सीमावर्ती जैसलमेर जिले में भी ऐसे अनेक विद्यालय भवन हैं, जो वहां पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित नहीं माने जा सकते। जब कभी बाड़मेर जिले जैसा हादसा कहीं घटित होता है, तब ही उनकी तरफ से थोड़ी बहुत सक्रियता दिखाई जाती है। जैसलमेर मुख्यालय पर भी कुछ ऐसे सरकारी स्कूल भवन हैं, जहां मरम्मत कार्य करवाने की तत्काल आवश्यकता है। ऐसा ही एक स्कूल है, चैनपुरा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय दुर्ग नं. 1। इस भवन की स्थिति वैसे तो बहुत अच्छी नजर आती है और रंग-रोगन भी हाल में करवाया गया है, लेकिन अंदर दो कमरों की छतों की जर्जरावस्था के कारण वहां बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता। स्कूल में करीब 180 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पिछले अर्से नगरपरिषद की तरफ से स्कूल में कुछ मरम्मत कार्य अवश्य करवाया गया था। कुम्हार पाड़ा की बालिका स्कूल का भवन जर्जर है, वहां से स्कूल तो स्थानांतरित कर दिया गया लेकिन कई तरह की कवायदों के बावजूद भवन को दुरुस्त नहीं करवाया जा सका है।

एक दशक से क्षतिग्रस्त भवन

रामदेवरा आरसीपी कॉलोनी रामदेवरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन पिछले एक दशक से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त अवस्था में है। वह कभी भी धराशाही होकर गिर सकता है। जर्जर विद्यालय के विद्यार्थियों को अन्य विद्यालय में स्थानांतरित करने के बाद से यह विद्यालय भवन और उसकी चारदीवारी लावारिस हालत में है। इस जर्जर भवन के पास ही एक अन्य विद्यालय है। पास के विद्यालय के विद्यार्थी कई बार इस जर्जर विद्यालय के पास खड़े रहते हैं। कई जने जर्जर भवन के पास से आवागमन करते हैं। ऐसे में जर्जर भवन से कभी भी हादसा हो सकता हैं। जिम्मेदार कई सालों से इस भवन की सुध लेने की फुर्सत नहीं निकाल पाए हैं।

50 साल पुराना स्कूल भवन जर्जर

नाचना. प्रदेश सरकार भले ही नए स्कूल खोल रही हो और नए भवन भी बनाए जा रहे हो, लेकिन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नाचना के भवन की हालत दयनीय है। करीब 50 वर्ष पुराने स्कूल भवन की छत जर्जर हालत में है। करीब 4 वर्ष पहले विद्यालय परिसर में विवेकानंद हॉल के आगे बरामदे की छत गिरी थी, लेकिन उस दिन रविवार होने के कारण विद्यालय की छुट्टी थी, इसलिए संभावित हादसा टल गया। विद्यालय में वर्तमान में 274 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। बारिश के दौरान विद्यालय भवन की छत से पानी टपकता है। जिसके कारण कक्षा कक्ष में बैठे विद्यार्थियों को अध्ययन करने में परेशानी होती है।