
नहरी क्षेत्र की आबोहवा के साथ जिंदगी में भी घुलता कीटनाशक
गिरधारीलाल लोहिया - मोहनगढ़ (जैसलमेर). नहरी पानी की उपलब्धता के साथ ही मोहनगढ़ नहरी क्षेत्र में फसलों की बीजाई अधिक होने लगी है, उत्पादन भी बढ़ा है। इसके साथ ही कीटनााक सेवन करने के मामले भी सामने आ रहे है। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि खेतों में खड़ी फसलों को विभिन्न रोगों से बचाव के लिए कीटनाशक का छिडक़ाव करते काश्तकार इसकी चपेट में आ जाते है, जिससे उनकी तबतीय खराब हो जाती है। कई बार आपसी कहासुनी आर्थिक परेशानी, खेतों में पानी को लेकर विवाद आदि होने की स्थिति में भी लोग कीटनाशक का सेवन कर लेते है।
आंकड़ों की जुबानी
आंकड़े बताते हंै कि गत साढ़े चार साल में लगभग 382 से अधिक कीटनाशक सेवन के मामले सामने आ चुके है, जिसमें से 22 से अधिक जने अपनी जान भी गंवा चुके है। वर्ष 2019 में 87, 2020 में 111, 2021 में 78, 2022 में 67, अगस्त 2023 तक 39 मामले सामने आ चुके है। इसी तरह 39 मामलों में से 25 मामले मोहनगढ़ क्षेत्र से सीधे उपचार के लिए जैसलमेर पहुंचे है।
हकीकत यह भी
कृषि आदान संघ के जिलाध्यक्ष हिम्मत चैधरी बताते हैं कि फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी को लेकर किसान खेतों में कीटनाशक का भरपूर उपयोग कर रहे है। इन कीटनाशकों को चार श्रेणी बांटा गया। कीटनाशक की बेतल या अन्य पेकिंग पर मार्का दिया गया है, जिसमें लाल रंग के मार्क को सबसे खतरनाक माना जाता है। पीले रंग के मार्क को उससे कम, आसमानी रंग के मार्क को तीसरे नंबर पर तथा हरे रंग के मार्क को सुरक्षित माना जाता है। अधिवक्ता रेवंतसिंह सोलंकी का कहना है कि मोहनगढ़ नहरी क्षेत्र में फसलों का उत्पादन बढा है। उत्पादन बढाने में कीटनाषक का उपयोग बहुतायत में होने लगा है। कीटनाशम के सेवन से मौत होने पर पुलिस में मर्ग दर्ज किया जाता है। एसडीएम या तहसीलदार या किसी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्ट मार्टम करवाकर रिपोर्ट पेश की जाती है। इसके अलावा कोई परेषान होकर या जबरदस्ती कीटनाशक पिलाकर मारने पर धारा 302 में मामला दर्ज होता है। किसी से परेषान हो कर काई कीटनाशक का सेवन करता है और मौत होने पर धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज होता है।
एक्सपर्ट व्यू: कीटनाशक व यूरिया के उपयोग के दौरान सावधानी जरूरी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधिकारी डॉ. केएस राठौड़ का कहना है कि इन दिनों खेतों में फसलों का अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए कीटनाशक व यूरिया का भारी मात्रा में उपयोग हो रहा है। जिससे हर किसी को नुकसान हो रहा है। कई बार घरेलू कलह, परेशानी, चिंता आदि को लेकर कीटनाशक का उपयोग कर लेते है, जिसे परिजन अस्पताल लेकर आते है। समय पर पहुंचने पर उनका उपचार संभव है। कीटनाशक के सेवन करने वाले व्यक्ति को जितना जल्दी हो सके अस्पताल पहुंचाना चाहिए। इसके साथ ही सेवन किए गए कीटनाशक की जानकारी भी लानी चाहिए। उसके अनुसार उनका उपचार किया जा सके। कीटनाशक सेवन करने वाले व्यक्ति को कुछ नहीं खिलाना पिलाना नहीं चाहिए। जितना हो सके उसको उल्टी करवानी चाहिए। समय रहते पीडि़त को उपचार नहीं मिला तो उसकी मौत भी होने की आशंका रहती है।
Published on:
21 Sept 2023 05:23 pm
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